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आपदा प्रबंधन सभी की सामूहिक जिम्मेदारीः मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 

Mintwire by Mintwire
10/01/2026
in उत्तराखंड
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आपदा प्रबंधन सभी की सामूहिक जिम्मेदारीः मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 
देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम, हाथीबड़कला में शीतलहर पूर्व तैयारी विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शीतलहर, बाढ़, मॉक अभ्यास, हवाई यातायात सहायता की एस.ओ.पी., आपदा प्रबंधन विभाग के नववर्ष कैलेंडर 2026 एवं आपदा प्रबंधन हस्तपुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने युवा आपदा मित्रों एवं वर्ष 2025 में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव में सराहनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया। आपदा प्रबंधन के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा उपलब्ध कराए गए चार वाहनों का भी मुख्यमंत्री ने फ्लैग ऑफ किया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आपदा प्रबंधन में किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि समस्त प्रशासन, स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और आम जनता की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को एक प्रमुख एजेंडा बनाया गया है। उत्तराखंड सरकार भी उन्हीं के मार्गदर्शन में आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दे रही है। राज्य में ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग एवं अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर लगाने, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम एवं आधुनिक रैपिड रिस्पॉन्स टीमों के गठन जैसे कदमों से आपदा जोखिम को घटाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में हिमस्खलन (एवलांच) एक गंभीर प्राकृतिक जोखिम है। राज्य के कई क्षेत्र हिमस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन, तीर्थाटन एवं पर्वतारोहण गतिविधियों को सुरक्षित बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग, प्रशिक्षित रेस्क्यू बलों की तैनाती तथा सुरक्षित पर्यटन प्रोटोकॉल को और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शीतलहर और अत्यधिक हिमपात से उत्पन्न चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए भी राज्य में कई ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं। सभी जिलों को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है और अलाव, रैन बसेरों तथा कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश भी जिलाधिकारियों को दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन आपस में बेहतर तालमेल बनाए रखें और अर्ली वार्निंग सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ करते हुए शीतलहर तथा हिमपात वाले क्षेत्रों में समय पर चेतावनी और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करें। शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया, जुकाम, फ्लू, निमोनिया जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सभी जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल टीमों को सक्रिय रखना होगा। विशेष रूप से सीमांत और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आवश्यक दवाइयों, हीटिंग उपकरणों एवं प्राथमिक उपचार सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए ‘युवा आपदा मित्र’ एवं ‘आपदा सखी’ जैसी पहल को और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के माध्यम से शीत ऋतु के दौरान होने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा तथा विभागों के मध्य समन्वय को मजबूत किया जाएगा।
इस अवसर पर एनडीएमए के विभागाध्यक्ष एवं सदस्य राजेंद्र सिंह, राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रूहेला, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, सचिव आनन्द स्वरूप, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, एसडीआरएफ के कमाण्डेंट अर्पण यदुवंशी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी आदि उपस्थित रहे।

उत्तराखण्ड में आपदा प्रबंधन निरंतर सीखने की प्रक्रिया: रूहेला

राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष विनय रूहेला ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे हिमालयी और आपदा-संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल एक विभागीय कार्य नहीं, बल्कि निरंतर सीखने, तैयारी करने और मैदान में प्रभावी ढंग से उतरने की प्रक्रिया है। बीते वर्षों में हमने यह अनुभव किया है कि आपदाएं स्वरूप बदल रही हैं, कभी शीतलहर, कभी बाढ़, कभी भूस्खलन और कभी अचानक घटित होने वाली घटनाएं। ऐसे में हमारी तैयारी भी उतनी ही बहुआयामी और व्यावहारिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोल्ड वेव का प्रभाव मैदानी, शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों में अलग-अलग रूप में सामने आता है। कहीं रैन बसेरों और बेघर लोगों की चुनौती है, तो कहीं दूरस्थ गांवों में ईंधन, बिजली और संपर्क की समस्या। इसलिए एक ही समाधान सब जगह लागू नहीं किया जा सकता, जिसके लिए क्षेत्र-विशिष्ट तैयारी जरूरी है।

तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी: मुख्य सचिव 

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि शीतलहर ऐसी आपदा है जो धीरे-धीरे अपना प्रभाव दिखाती है, परंतु इसका असर व्यापक और गहरा होता है। यह केवल तापमान में गिरावट की घटना नहीं है, बल्कि यह आम जनजीवन, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन व्यवस्था, पशुधन, आजीविका और विशेष रूप से संवेदनशील वर्गों के जीवन को सीधे प्रभावित करती है। ऐसे में शीतलहर प्रबंधन को हमें केवल मौसमी चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक दायित्व के रूप में देखना होगा।
आज के समय में प्रभावी आपदा प्रबंधन, तकनीक के सुव्यवस्थित और विवेकपूर्ण उपयोग के बिना संभव नहीं है। शीतलहर जैसी आपदाओं में पूर्व चेतावनी प्रणाली, मौसम आधारित पूर्वानुमान, रियल-टाइम डेटा शेयरिंग, वैकल्पिक संचार व्यवस्था तथा फील्ड स्तर से प्राप्त त्वरित फीडबैक निर्णय प्रक्रिया को अधिक सटीक और समयबद्ध बनाते हैं। ळप्ै आधारित मैपिंग, डैशबोर्ड के माध्यम से स्थिति की निरंतर निगरानी, मोबाइल एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सूचनाओं का त्वरित प्रसार तथा ड्रोन और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाता है।

एनडीएमए उत्तराखण्ड के साथ मजबूती से खड़ा है: राजेंद्र सिंह 

एनडीएमए के विभागाध्यक्ष एवं सदस्य राजेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक और सामाजिक संवेदनशीलता को वे केवल एनडीएमए का विभागाध्यक्ष होने के नाते ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी भली-भांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं चकराता क्षेत्र से हैं और इस क्षेत्र की शीत जलवायु, कठिन जीवन परिस्थितियों और यहां के लोगों की सहनशीलता से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से वे उत्तराखण्ड को आश्वस्त करते हैं कि एनडीएमए उत्तराखण्ड के साथ हर स्तर पर खड़ा है। नीति मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और राष्ट्रीय स्तर के सर्वोत्तम अनुभवों को साझा करने में एनडीएमए पूरी तरह सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे राज्यों के अनुभव देश के अन्य हिमालयी और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।

आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाएंगी एसओपी: सुमन

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शीतलहर प्रबंधन केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर लागू होने योग्य, व्यावहारिक और समयबद्ध रणनीतियों के रूप में विकसित हो। कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न विभागों की भूमिकाओं और उत्तरदायित्वों को और अधिक स्पष्ट करना, विभागीय समन्वय को मजबूत करना, पूर्व चेतावनी प्रणाली और फील्ड-लेवल प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करना तथा तैयारियों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित, स्पष्ट एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शीतलहर प्रबंधन, वायु सेवा अनुरोध, बाढ़ प्रबंधन तथा मॉक ड्रिल के आयोजन एवं क्रियान्वयन हेतु मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार की गई हैं।
आपदा प्रबंधन हस्तपुस्तिका और एसओपी का विमोचन 
कार्यशाला में मुख्यमंत्री धामी ने शीतलहर प्रबंधन, वायु सेवा अनुरोध, बाढ़ प्रबंधन तथा मॉक ड्रिल के आयोजन एवं क्रियान्वयन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया का विमोचन भी किया। इन एसओपी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि आपदा की प्रत्येक अवस्था-चाहे वह पूर्व चेतावनी एवं तैयारी का चरण हो, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया एवं समन्वय की स्थिति हो अथवा आपदा के पश्चात राहत-बचाव और पुनर्वास की प्रक्रिया हो-हर स्तर पर संबंधित विभागों, अधिकारियों एवं कार्मिकों की भूमिका, जिम्मेदारी और अपेक्षित कार्यवाही पूरी तरह स्पष्ट रहे। इसके साथ ही युवा आपदा मित्र योजना के तहत प्रशिक्षण ले रहे स्वयंसेवकों के लिए आपदा प्रबंधन हस्तपुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
नव वर्ष कैलेंडर का विमोचन
उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिरकरण की ओर से आईईसी गतिविधियों के तहत मुद्रित नव वर्ष 2026 कैलेण्डर का विमोचन भी माननीय मुख्यमंत्री जी ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि माह-विशिष्ट आपदाओं से बचाव संबंधी जानकारी को कैलेण्डर में समाहित किया गया है, इससे कहीं न कहीं व्यापक स्तर पर जागरूकता का प्रचार-प्रसार होगा।
युवा आपदा मित्रों का सम्मान
मुख्यमंत्री धामी ने शुक्रवार को कोल्ड वेव पर आयोजित कार्यशाला के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी युवा आपदा मित्र योजना के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले युवा आपदा मित्रों का भी सम्मान किया। इस दौरान  मनीषा पोखरियाल, भारत स्काउट एंड गाइड,  सुधांशु बमराड़ा, भारत स्काउट एंड गाइड,  निधि पंवार, एनसीसी,  अभिनव भदोला, एनएसएस तथा  अंशुमान सजवाण, एनएसएस को सम्मानित किया गया।
एनडीआरएफ के साहसी जवानों का सम्मान
कार्यशाला में 16 सितम्बर 2025 को देहरादून जनपद के प्रेमनगर क्षेत्र में स्वर्णा नदी में आई अचानक बाढ़ के दौरान बिजली पोल पर फंसे एक व्यक्ति का सुरक्षित रेस्क्यू करने वाले एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर लक्ष्मण थपलियाल तथा हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह को सम्मानित किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ने साढ़े तीन घंटे तक पोल को पकड़कर लटके रहे देशपाल कश्यप, निवासी प्रेमनगर को भी उनके धैर्य और साहस के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
स्टेट बैंक आफ इंडिया ने सीएसआर मद में दिए चार वाहन
कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने स्टेट बैंक आफ इंडिया द्वारा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को आपदा के दौरान प्रशासनिक तंत्र के सुगम आवागमन के लिए सीएसआर मद में उपलब्ध कराए गए चार वाहनों को फ्लैग आफ किया। यह वाहन चमोली, टिहरी, देहरादून और पौड़ी जनपद को दिए गए हैं।

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