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विश्व पुस्तक मेले में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक की दो पुस्तकों का हुआ विमोचन

Mintwire by Mintwire
20/01/2026
in उत्तराखंड
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विश्व पुस्तक मेले में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक की दो पुस्तकों का हुआ विमोचन

देहरादून : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा भारत मंडपम नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में प्रसिद्ध साहित्यकार एवं देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की दो पुस्तकों का विमोचन संपन्न हुआ।

विकसित भारत संकल्प और यह मच्छी मांगते हैं भारत के युवाओं और शिक्षा नीति पर आधारित इन दो पुस्तकों ‘आत्मनिर्भरता से नवभारत निर्माण’ तथा ‘बदलते वैश्विक परिवेश में मूल्य आधारित शिक्षा’ मैं डॉक्टर निशंक की विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित विचारों टीजक आलेख हैं।‘आत्मनिर्भरता से नवभारत निर्माण’ पुस्तक में डॉ. निशंक ने आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और नीतिगत संदर्भों में गहराई से विश्लेषित किया है। पुस्तक में संकलित आलेख बताते हैं कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि, स्वदेशी नवाचार और राष्ट्रीय आत्मसम्मान से जुड़ा व्यापक विचार है।

दूसरी पुस्तक ‘वैश्विक बदलते परिदृश्य में मूल्य आधारित शिक्षा’ वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और नई शिक्षा नीति (NEP) पर केंद्रित एक गंभीर और दूरदर्शी विमर्श प्रस्तुत करती है। लेखक का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना होना चाहिए। पुस्तक में यह तथ्य उभरकर आता है कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यदि शिक्षा मूल्यविहीन होगी, तो समाज दिशाहीन हो जाएगा। डॉ. निशंक ने भारतीय संस्कृति, गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा के संतुलन पर विशेष बल देते हुए नई शिक्षा नीति को भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया है।

दोनों पुस्तकों में युवाओं के भविष्य को केंद्र में रखा गया है। लेखक का विश्वास है कि भारत की युवा शक्ति ही देश को विश्वगुरु की ओर ले जाएगी, बशर्ते उन्हें सही शिक्षा, सही मूल्य और सही दिशा मिले।

हंस प्रकाशन द्वारा द्वारा प्रकाशित इन दोनों पुस्तकों का विमोचन शिक्षाविद और हंसराज कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर रमा, वरिष्ट साहित्यकार श्रीमती वंदना यादव, स्तंभ लेखक डॉ. वेद प्रकाश, कथाकार डॉ. अंजू रानी और डॉ. बेचैन कंडियाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत की युवा शक्ति ही देश को विश्वगुरु की ओर ले जाएगी, बशर्ते उन्हें सही शिक्षा, सही मूल्य और सही दिशा मिले। ये दोनों पुस्तकें समकालीन भारत के सपनों, चुनौतियों और संभावनाओं का प्रामाणिक दस्तावेज हैं।
कहा कि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का यह लेखन राष्ट्रबोध, शिक्षा-दृष्टि और वैचारिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। नवभारत के निर्माण और मूल्य आधारित शिक्षा पर चिंतन करने वाले प्रत्येक पाठक के लिए ये पुस्तकें अत्यंत उपयोगी हैं।

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