ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम JEE Main 2026 के पहले सेशन का रिजल्ट जारी हो चुका है. इसके बाद लाखों छात्रों का फोकस अब देश के बेहतरीन इंजीनियरिंग कॉलेजों पर है. खासतौर पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NITs में एडमिशन को लेकर छात्रों के मन में कई सवाल हैं. हर साल बड़ी संख्या में उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होते हैं, इसलिए कटऑफ रैंक और परसेंटाइल में बदलाव देखा जाता है. बीटेक की कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल जैसी ब्रांच में कंपटीशन सबसे ज्यादा रहता है.
98 या उससे कम परसेंटाइल पर कहां मिलेगा एडमिशन
आमतौर पर टॉप NITs में एडमिशन के लिए 99 या उससे अधिक परसेंटाइल को सुरक्षित माना जाता है. हालांकि ऐसा जरूरी नहीं है कि 98 या उससे कम परसेंटाइल पर एडमिशन नहीं मिलेगा. कई बार ब्रांच, कैटेगरी और होम स्टेट कोटा के कारण कम स्कोर पर भी सीट मिल जाती है. 99 परसेंटाइल या उससे ज्यादा स्कोर करने वाले छात्रों को टॉप NITs में CSE, ECE, ME और CE जैसी कोर ब्रांच मिलने की संभावना ज्यादा रहती है. वहीं 98 से 99 के बीच स्कोर करने वालों को टॉप 10 NITs में कोर के अलावा दूसरी ब्रांच भी मिल सकती है.
इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी NIRF रैंकिंग
शिक्षा मंत्रालय द्वारा हर साल नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी NIRF रैंकिंग जारी की जाती है. NIRF 2025 के अनुसार देश के टॉप NITs में तिरुचिरापल्ली, राउरकेला, सुरथकल, वारंगल, कालीकट, दुर्गापुर, सिलचर, जयपुर, कुरुक्षेत्र और नागपुर शामिल हैं. यह रैंकिंग छात्रों को कॉलेज चुनने में मदद करती है और संस्थानों की अकादमिक गुणवत्ता, रिसर्च और प्लेसमेंट जैसे फैक्टर्स पर आधारित होती है.
NITs में एडमिशन JEE Main स्कोर और JoSAA काउंसलिंग के जरिए होता है. काउंसलिंग के अलग अलग राउंड में सीट अलॉट की जाती है. जनरल, OBC, SC, ST और EWS कैटेगरी के लिए कटऑफ अलग होती है. अपने होम स्टेट के NIT में एडमिशन के लिए कटऑफ अक्सर दूसरे राज्यों के मुकाबले थोड़ी कम देखी जाती है.
जनरल कैटेगरी के लिए टॉप NITs
जनरल कैटेगरी के लिए टॉप NITs में एडमिशन का कटऑफ आम तौर पर 99 परसेंटाइल या उससे ज्यादा रहता है. EWS कैटेगरी के लिए यह लगभग 78 से 83 परसेंटाइल के बीच हो सकता है. OBC NCL कैटेगरी में यह करीब 77 से 81 परसेंटाइल तक रहता है. SC कैटेगरी के लिए 57 से 61 परसेंटाइल और ST कैटेगरी के लिए 51 से 54 परसेंटाइल के आसपास कटऑफ देखी जा सकती है. ये आंकड़े अनुमानित हैं और हर साल बदल सकते हैं.
NITs में एडमिशन के फैक्टर्स
NITs में एडमिशन कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है. इसमें कैटेगरी रिजर्वेशन, होम स्टेट कोटा, चुनी गई ब्रांच और काउंसलिंग के आखिरी राउंड में सीटों की उपलब्धता शामिल होती है. कुछ ब्रांच में कंपटीशन कम होता है, इसलिए वहां क्लोजिंग रैंक भी कम हो सकती है. पेपर का डिफिकल्टी लेवल और कुल उम्मीदवारों की संख्या के कारण हर साल कटऑफ में बदलाव आता है. इसलिए छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे सभी काउंसलिंग राउंड में भाग लें और कॉलेज व ब्रांच का चुनाव समझदारी से करें.


