उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता और तत्परता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है, जहां मानसिक रूप से कमजोर एक लापता महिला को सुरक्षित बरामद कर उसके परिजनों से मिलाया गया. इस कार्रवाई से न केवल परिजनों को राहत मिली, बल्कि स्थानीय लोगों में भी पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है.
जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 को कोटद्वार निवासी एक व्यक्ति ने कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि उनकी चाची, 48 वर्षीय शोभा देवी, सुबह घर से बिना बताए कहीं चली गई हैं. उन्होंने यह भी बताया कि महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, जिसके चलते उनके साथ किसी अनहोनी की आशंका बनी हुई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
पुलिस ने लिया एक्शन
कोतवाली कोटद्वार पुलिस ने बिना समय गंवाए महिला की तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया. सबसे पहले आसपास के क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया. इसके साथ ही इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, ताकि महिला की अंतिम लोकेशन का पता लगाया जा सके. पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया, जिससे हर संभावित सूचना पर नजर रखी जा सके.
जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि महिला को दुगड्डा क्षेत्र में घूमते हुए देखा गया है. इस सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तत्काल दुगड्डा और उसके आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन उस समय महिला का कोई सुराग नहीं लग पाया. इसके बावजूद पुलिस ने अपने प्रयास जारी रखे और लगातार क्षेत्र में निगरानी बनाए रखी.
कैसे मिली महिला
इसी बीच अगले दिन सुबह पुलिस को सूचना मिली कि महिला कोटद्वार क्षेत्र में ही घूम रही है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम हरकत में आई और बताए गए स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया. कुछ ही समय में पुलिस ने महिला को ढूंढ निकाला और उसे सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया.
पुलिस ने महिला की पहचान सुनिश्चित करने के बाद उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया. लंबे समय बाद अपनी परिजन को सकुशल देखकर परिवार के सदस्यों ने राहत की सांस ली और कोटद्वार पुलिस का आभार व्यक्त किया. परिजनों ने कहा कि पुलिस की तत्परता और समर्पण के चलते ही उनकी प्रियजन सुरक्षित वापस मिल सकीं.
पुलिस ने क्या कहा
इस पूरे अभियान में उप निरीक्षक सैय्यदुल बहार, कांस्टेबल चंद्रपाल और हेड कांस्टेबल कुलदीप की महत्वपूर्ण भूमिका रही. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आमजन की सुरक्षा और सहायता के लिए वे हमेशा तत्पर हैं और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई उनकी प्राथमिकता रहती है.
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सतर्कता, तकनीक और स्थानीय सूचना तंत्र के बेहतर समन्वय से किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति का समाधान संभव है.


