हरिद्वार में संत सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा कि जुलाई से प्रदेश के सभी मदरसों में उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा.
उन्होंने चेतावनी दी कि जो संस्थान इस नियम का पालन नहीं करेंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा.
मदरसा बोर्ड भंग करने का फैसला
सरकार ने राज्य में संचालित मदरसा बोर्ड को खत्म करने का भी निर्णय लिया है. इसके पीछे तर्क दिया गया है कि सभी छात्रों को एक समान शिक्षा प्रणाली के तहत लाया जाए और शिक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित हो.
चारधाम यात्रा पर भी फोकस
सीएम ने कहा कि चारधाम यात्रा के लिए इस बार बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं. पिछले अनुभवों के आधार पर यात्रियों को सुविधाएं देने के लिए तैयारियां मजबूत की गई हैं.
महिला आरक्षण पर विपक्ष पर निशाना
महिला आरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि जिन दलों ने लंबे समय तक देश में शासन किया, उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए ठोस कदम नहीं उठाए.
संत समाज ने किया समर्थन
सीएम के इस फैसले को संत समाज का समर्थन भी मिला. निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि और स्वामी चिदानंद मुनि ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था में समानता आएगी.
संस्कृति और शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने संतों के योगदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया.


