आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. करीब 15 साल तक पार्टी से जुड़े रहने के बाद उन्होंने घोषणा की कि वह जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे. उनके साथ छह अन्य सांसदों के भी बीजेपी में जाने की खबर है, जिससे पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है.
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया ऐलान
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चड्ढा ने कहा कि उन्हें अपनी ही पार्टी में दबाया जा रहा था और उनकी आवाज को महत्व नहीं दिया गया. उन्होंने खुद को “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” बताते हुए कहा कि अब वह जनता के मुद्दों को खुलकर उठाना चाहते हैं. इस दौरान Sandeep Pathak और Ashok Mittal के भी बीजेपी में शामिल होने की बात सामने आई.
कई सांसदों के साथ जाने की संभावना
चड्ढा ने दावा किया कि पूर्व क्रिकेटर Harbhajan Singh, Swati Maliwal सहित अन्य सांसद भी उनके साथ पार्टी छोड़ सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हो सकते हैं, जो दलबदल कानून के तहत जरूरी दो-तिहाई संख्या से अधिक है.
क्यों छोड़ी AAP?
अपने फैसले को सही ठहराते हुए चड्ढा ने कहा कि Arvind Kejriwal के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक चुकी है. उनका आरोप है कि पार्टी अब जनता के हितों के बजाय निजी फायदे के लिए काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें महसूस हो रहा था कि वह गलत जगह पर हैं.
PM मोदी की तारीफ
चड्ढा ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि देश ने उनके नेतृत्व को बार-बार समर्थन दिया है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह आगे भी जनता के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाते रहेंगे.
AAP का पलटवार
AAP नेता Sanjay Singh ने इस घटनाक्रम को “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी ने उनके सांसदों को तोड़ने की कोशिश की है. उन्होंने इसे पंजाब और देश की जनता के साथ विश्वासघात बताया.
पार्टी में बढ़ता मतभेद
पिछले कुछ समय से चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती जा रही थी. उन पर आरोप लगे कि उन्होंने संसद में पार्टी लाइन के खिलाफ नरम रुख अपनाया और कई अहम मुद्दों पर सक्रिय नहीं दिखे. यही मतभेद धीरे-धीरे बड़े विवाद में बदल गया.
राजनीति में नया मोड़
चड्ढा का यह कदम AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब पार्टी पहले से ही राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है. आने वाले समय में यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति की दिशा पर भी असर डाल सकता है.


