उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोट ब्लॉक में एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज सामने आई है। क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई की टीम ने विशेष अभियान के दौरान एक प्राचीन सुरंग (गुफा) का पता लगाया है, जिसे क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
दुर्गम इलाके में स्थित है सुरंग
यह सुरंग पौड़ी मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर गढ़खेत क्षेत्र के आगे गींठीछेड़ा झरने के नीचे स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए लगभग 1 किलोमीटर का कठिन पैदल रास्ता तय करना पड़ता है, जो पहाड़ी धारा के किनारे-किनारे गुजरता है।
मानव निर्मित होने के संकेत
पुरातत्व टीम के अनुसार गुफा का प्रवेश द्वार लगभग 20 मीटर ऊंची खड़ी चट्टान पर स्थित है। इसके अंदर जाने के लिए पत्थरों को काटकर बनाई गई करीब 6 सीढ़ियां मौजूद हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह संरचना मानव द्वारा बनाई गई हो सकती है।
सुरक्षा आश्रय के रूप में इस्तेमाल की संभावना
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि प्राचीन समय में इस सुरंग का उपयोग बाहरी हमलों या जंगली जानवरों से बचने के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में किया जाता होगा। गुफा के अंदर एक साथ 6 से 8 लोगों के ठहरने की पर्याप्त जगह भी पाई गई है।
दूसरी सुरंग से जुड़ाव की आशंका
इस गुफा से करीब 200 मीटर दूर एक और सुरंग का मुहाना भी मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये दोनों सुरंगें आपस में जुड़ी हो सकती हैं, हालांकि इसकी पुष्टि विस्तृत सर्वेक्षण और वैज्ञानिक जांच के बाद ही होगी।
प्रागैतिहासिक काल से जुड़ाव की संभावना
भौगोलिक स्थिति और आसपास के प्राकृतिक वातावरण को देखते हुए इस सुरंग को प्रागैतिहासिक काल से जोड़कर देखा जा रहा है। यह खोज प्राचीन मानव जीवन और उनके सुरक्षा तंत्र को समझने में मददगार साबित हो सकती है।
आगे होगा विस्तृत सर्वे और उत्खनन
पुरातत्व विभाग ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही विशेषज्ञों की टीम के साथ इस स्थल का विस्तृत सर्वे और जरूरत पड़ने पर उत्खनन कार्य भी किया जाएगा, जिससे इस सुरंग के इतिहास और महत्व को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
कुल मिलाकर, यह खोज न सिर्फ पौड़ी गढ़वाल बल्कि पूरे उत्तराखंड की ऐतिहासिक धरोहर को उजागर करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


