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एक्ट्रेस से सांसद बनीं सयानी घोष: भाषण, विवाद और स्टाइल से बंगाल की राजनीति में छाईं, कैसे बनीं TMC की स्टार प्रचारक?

Mintwire by Mintwire
28/04/2026
in देश, राज्य
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पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 142 सीटों पर दूसरे और अंतिम चरण के चुनाव प्रचार का शोर सोमवार शाम 5 बजे थमने वाला है. इस पूरे चुनावी माहौल में एक नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, वह है Sayani Ghosh. मीडिया और सोशल मीडिया दोनों जगह उनकी खूब चर्चा हो रही है.

आक्रामक भाषण और गायन का अनोखा अंदाज़

सयानी घोष अपने तीखे और आत्मविश्वास भरे भाषणों के लिए जानी जाती हैं. खास बात यह है कि वह राजनीतिक मंचों पर सिर्फ भाषण ही नहीं देतीं, बल्कि अपने गायन से भी लोगों का ध्यान खींचती हैं. यही अलग अंदाज़ उन्हें भीड़ में अलग पहचान देता है.

राजनीति से पहले का सफर

राजनीति में आने से पहले सयानी घोष बंगाली फिल्म और टीवी इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा थीं. University of Calcutta से पढ़ाई करने वाली सयानी ने स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था.
टीवी एंकरिंग, अभिनय और मंच संचालन ने उनकी बोलने की कला को और निखारा, जो बाद में उनकी राजनीतिक ताकत बन गई.

राजनीति में एंट्री और पहला चुनाव

साल 2021 में Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress में शामिल होने के बाद सयानी घोष ने आसनसोल सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा. हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी.

विवादों से भी रहा नाता

राजनीतिक करियर के दौरान सयानी घोष कई बार विवादों में भी रहीं. 2021 में त्रिपुरा में चुनाव प्रचार के दौरान ‘खेला होबे’ नारे को लेकर उन्हें गिरफ्तार किया गया था. इस घटना ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया.

इसके अलावा 2023 में एक भर्ती घोटाले की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनसे लंबी पूछताछ भी की गई.

2024 में बड़ी जीत

2021 की हार के बाद सयानी ने हार नहीं मानी. 2024 में उन्होंने जाधवपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर संसद पहुंचीं. इसके बाद उनके भाषणों ने उन्हें नई पहचान दिलाई.

संसद में दमदार उपस्थिति

संसद में उनके भाषण अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं. वह बांग्ला, हिंदी और अंग्रेज़ी में धाराप्रवाह बोलती हैं.

एक चर्चित भाषण में उन्होंने भारतीय संविधान को अपनी “भगवद गीता” बताया. वहीं, कई मौकों पर उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, विदेश नीति और संघवाद जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.
प्रधानमंत्री Narendra Modi पर भी उन्होंने कई बार सीधे सवाल उठाए हैं.

धर्मनिरपेक्ष छवि और अलग स्टाइल

सयानी घोष का अंदाज़ पारंपरिक राजनीति से थोड़ा अलग है. वह अपने भाषणों में शायरी, गीत और धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल करती हैं.

कभी नज़्म पढ़ती हैं तो कभी धार्मिक ग्रंथों के श्लोक भी सुनाती हैं. उनके इस अंदाज़ को कुछ लोग सराहते हैं तो कुछ इसे वोट बैंक की राजनीति मानते हैं.
हालांकि वह खुद को धर्मनिरपेक्ष विचारधारा की समर्थक बताती हैं और सभी समुदायों से समर्थन की अपील करती हैं.

ममता बनर्जी से करीबी

सयानी घोष खुद को Mamata Banerjee की करीबी और उनकी “सिपाही” बताती हैं. उनके भाषणों में ममता बनर्जी का जिक्र अक्सर होता है.
वह उनके स्टाइल को भी फॉलो करती नजर आती हैं और इसे अपने नेता के प्रति सम्मान बताती हैं.

राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता दायरा

टीएमसी ने उन्हें त्रिपुरा और असम जैसे राज्यों में भी चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी, जिससे उनकी पहचान पश्चिम बंगाल से बाहर भी बनी.
पार्टी में उन्होंने Mahua Moitra जैसी मजबूत महिला नेताओं के बीच अपनी जगह बनाई है.

आगे का रास्ता

सयानी घोष आज पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक चर्चित युवा चेहरा बन चुकी हैं. हालांकि उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं.
आने वाले चुनाव और उनका प्रदर्शन ही तय करेगा कि वह भविष्य में राजनीति में कितनी ऊंचाई तक पहुंचती हैं.

Tags: Actress Turned PoliticianIndia ElectionsIndian PoliticsJadavpur MPMamata BanerjeeParliament SpeechPolitical SpeechSayani GhoshTMC LeaderTMC NewsTrending News IndiaWest Bengal PoliticsWomen in PoliticsYoung Politicians India
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