लालकुआं (नैनीताल): उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में जंगली हाथी का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। टांडा रेंज में एक बार फिर हाथी के हमले में 76 वर्षीय मैना देवी की दर्दनाक मौत हो गई। बीते 72 घंटों में यह तीसरी घटना है, जिससे पूरे इलाके में भय और दहशत का माहौल बना हुआ है।
झा कॉलोनी, पंतनगर निवासी मैना देवी रोज की तरह जंगल में जलौनी लकड़ी लेने गई थीं। गैस की किल्लत के चलते यह उनके लिए मजबूरी बन गई थी। लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
अचानक सामने आया हाथी, मचा हड़कंप
प्रत्यक्षदर्शी महिलाओं के अनुसार, वे सभी जंगल में लकड़ी बीन रही थीं, तभी अचानक टहनियों के टूटने और भारी कदमों की आवाज सुनाई दी। पीछे मुड़कर देखा तो एक विशालकाय हाथी, जिसका एक दांत टूटा हुआ था और वह लंगड़ाकर चल रहा था, उनकी ओर तेजी से बढ़ता नजर आया।
मैना देवी के “भागो-भागो” चिल्लाने पर अन्य महिलाएं झाड़ियों में छिप गईं, जबकि वह खुद जंगल की ओर भागने लगीं।
सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया
कुछ ही पलों में हाथी ने मैना देवी को पकड़ लिया। उसने उन्हें सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया और फिर पैरों से कुचलकर मार डाला। हाथी की चिंघाड़ से पूरा जंगल गूंज उठा। इस खौफनाक मंजर को देख साथ गई महिलाएं बदहवास हालत में गांव पहुंचीं और ग्रामीणों को सूचना दी।
तीन दिन में तीन मौतें, एक ही हाथी पर शक
ग्रामीणों का कहना है कि बीते दो दिनों में जिन दो लोगों की मौत हुई थी, वही हाथी इस घटना के पीछे भी हो सकता है। सभी घटनाएं एक ही क्षेत्र के आसपास हुई हैं। हालांकि वन विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।
वन विभाग अलर्ट, गश्त बढ़ाई गई
लगातार हो रही घटनाओं के बाद वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। डीएफओ उमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि जंगलों में गश्त बढ़ा दी गई है और टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।
ग्रामीणों से अपील: जंगल न जाएं
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे लकड़ी लेने जंगल न जाएं। यदि किसी को जलौनी लकड़ी की आवश्यकता हो तो विभाग को सूचित करें, ताकि उन्हें घर पर ही लकड़ी उपलब्ध कराई जा सके।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने इलाके में दहशत फैला दी है और लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं।


