असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस्तीफा देने के कुछ घंटों बाद ही अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए समय मांगा है. इस बीच असम कांग्रेस के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि पार्टी हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद बोरा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है.
असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बोरा से उनके इस्तीफे के बाद बात की. गोगोई के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने बोरा का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया.
बोरा ने इस्तीफे की क्या वजह बताई?
इस्तीफा देते समय बोरा ने कहा था कि वो राजनीति में बने रहेंगे. उन्होंने सोमवार सुबह 8 बजे कांग्रेस से इस्तीफा देने की जानकारी दी और कहा कि वो पार्टी हाईकमान के जवाब का इंतजार करेंगे, उसके बाद ही आगे कुछ कहेंगे. उन्होंने दोहराया कि वो राजनीति में एक्टिव रहेंगे.
बोरा ने यह भी कहा कि वो पिछले 32 साल से कांग्रेस के “एक्टिव और समर्पित कार्यकर्ता” रहे हैं. लेकिन, पिछले कुछ दिनों में पैदा हुई “कुछ परिस्थितियों” की वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया. हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि भविष्य में वो क्या कदम उठाएंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं किया है.
उनका इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब असम में मार्च-अप्रैल के बीच विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. चुनाव आयोग ने अभी तारीखों की घोषणा नहीं की है. मई में पिछले साल बोरा को असम कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह सांसद गौरव गोगोई को जिम्मेदारी दी गई थी.
CM हिमंत बिस्वा सरमा का रिएक्शन
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बोरा के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया था, तभी यह स्थिति आने की उम्मीद थी.
सरमा ने आरोप लगाया कि असम कांग्रेस में टिके रहने के लिए या तो किसी बड़े राजनीतिक परिवार से होना जरूरी है या अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ा होना चाहिए. उन्होंने कहा कि बोरा इन दोनों में से नहीं थे, इसलिए उन्हें किनारे किया जा रहा था, जबकि गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन मजबूत हो रहे थे.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस्तीफे से पहले उनकी बोरा से कोई बातचीत नहीं हुई थी, लेकिन वह मंगलवार को उनसे मिलकर आगे की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे.


