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IG रैंक के अफसरों को DIG पद पर भेजने पर विवाद, हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

Mintwire by Mintwire
17/03/2026
in उत्तराखंड, देश, राज्य
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देहरादून: उत्तराखंड कैडर के दो भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों ने केंद्र में प्रतिनियुक्ति के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें Deputy Inspector General (DIG) के पद पर भेजने का फैसला दुर्भावनापूर्ण है और यह प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग है.

यह याचिका 2005 बैच की IPS अधिकारी नीरू गर्ग और 2006 बैच के IPS अधिकारी अरुण मोहन जोशी की ओर से दायर की गई है.

हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय शामिल हैं, ने केंद्र और राज्य सरकार से संबंधित आदेशों को रिकॉर्ड पर पेश करने को कहा है.

बिना सहमति भेजा गया प्रतिनियुक्ति प्रस्ताव

याचिका में अरुण मोहन जोशी ने कहा है कि उन्हें यह जानकारी ही नहीं थी कि राज्य सरकार ने उनका नाम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भेजा है. उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि उनका empanelment नहीं हुआ था, इसलिए उन्हें Inspector General (IG) की जगह BSF में DIG के पद पर भेजा जा रहा है, जो उनके वर्तमान पद से नीचे है.

जोशी वर्तमान में आईजी, CID के पद पर तैनात हैं. वहीं नीरू गर्ग इस समय आईजी (फायर) के पद पर कार्यरत हैं.

पहले वापस लिया गया था प्रस्ताव

याचिका में कहा गया है कि दोनों अधिकारियों ने प्रतिनियुक्ति के लिए अपनी सहमति नहीं दी थी. जब उन्हें इस बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने सरकार से संपर्क किया. इसके बाद 4 जनवरी 2025 को राज्य सरकार ने उनका नाम प्रतिनियुक्ति प्रस्ताव से वापस ले लिया था.

पांच साल के लिए प्रतिनियुक्ति से किया गया था प्रतिबंधित

इसके बाद 3 फरवरी 2025 को केंद्र सरकार ने आदेश जारी कर दोनों अधिकारियों की नियुक्ति रद्द करते हुए उन्हें पांच साल के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, विदेशी नियुक्ति और कंसल्टेंसी से डिबार कर दिया था.

दोबारा भेजा गया नाम, फिर जारी हुआ आदेश

याचिका में कहा गया है कि डिबारमेंट के बावजूद उत्तराखंड सरकार ने दोबारा दोनों अधिकारियों के नाम केंद्र को भेज दिए. इसके बाद 5 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने आदेश जारी कर उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त कर दिया.

‘राज्य से हटाने की कोशिश’ का आरोप

अरुण मोहन जोशी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि यह फैसला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि उन्हें राज्य कैडर से हटाने की कोशिश है.

उन्होंने कहा कि उन्हें पहले एक CBCID जांच से अचानक हटा दिया गया था, जबकि उसी मामले में हाईकोर्ट ने उनकी कार्यशैली की सराहना भी की थी.

जल्दबाजी में जारी हुआ रिलीविंग ऑर्डर

याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार के 5 मार्च के आदेश के तुरंत बाद 6 मार्च 2026 को राज्य सरकार ने असामान्य तेजी दिखाते हुए उन्हें राज्य कैडर से तुरंत रिलीव करने का आदेश जारी कर दिया.

Tags: Dehradundehradun newsUttarakhand newsUttarakhand news hindi
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