उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान चारधाम यात्रा की व्यवस्था को लेकर सदन में चर्चा हुई. नियम 58 के तहत बदरीनाथ के विधायक लखपत बुटोला ने यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ावों पर अक्सर लंबा जाम लग जाता है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि कई बार यात्री पांच से छह घंटे तक जाम में फंसे रहते हैं. इसके बावजूद सरकार अभी तक कोई ठोस वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं कर पाई है. उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान ट्रैफिक को संभालने के लिए वैकल्पिक रास्तों की जरूरत है ताकि यात्रियों को राहत मिल सके.
रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल
उन्होंने रजिस्ट्रेशन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि चारधाम यात्रा में आने वाले यात्रियों के लिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था या तो खत्म की जानी चाहिए या फिर इसके लिए ऑफलाइन विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कई यात्रियों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में परेशानी होती है, इसलिए ऑफलाइन व्यवस्था होने से उन्हें सुविधा मिलेगी.
इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि चारधाम यात्रा को 24 घंटे के लिए खुला रखने की बजाय इसे तय समय के लिए खोला जाए. उनके अनुसार यात्रा को सुबह चार बजे से रात नौ बजे तक ही खोला जाना चाहिए. इससे यात्रा को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा और ट्रैफिक की समस्या भी कम हो सकती है.
सदन में उठाया मुद्दा
वहीं, विधायक विक्रम सिंह नेगी ने भी चारधाम यात्रा का मुद्दा सदन में उठाया. उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान यात्रियों की संख्या तय करने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए. उनका कहना था कि हर श्रद्धालु को चारधाम के दर्शन का अवसर मिलना चाहिए, इसलिए यात्रियों की संख्या पर सीमा लगाना उचित नहीं है.
इस पर संसदीय कार्यमंत्री ने सदन को बताया कि राज्य सरकार चारधाम यात्रा को लेकर पूरी तरह गंभीर है और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चारधाम यात्रा में आने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में चारधाम यात्रा में करीब 10 लाख यात्री आए थे. लेकिन अब यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 51 लाख तक पहुंच गया है. यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यात्रा को व्यवस्थित करना जरूरी हो गया है.
रजिस्ट्रेशन का क्या है मकसद
संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों के रजिस्ट्रेशन का मुख्य उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है. अगर किसी वजह से कोई दुर्घटना हो जाती है तो रजिस्ट्रेशन के जरिए यात्रियों की जानकारी आसानी से मिल सकती है. इससे राहत और बचाव कार्य में भी मदद मिलती है.
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर लगातार काम कर रही है. यात्रा मार्गों की व्यवस्था, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विभागों को निर्देश दिए गए हैं.
31 मार्च तक पूरी होंगी तैयारियां
संसदीय कार्यमंत्री ने बताया कि चारधाम यात्रा से जुड़ी सभी तैयारियां 31 मार्च तक पूरी कर ली जाएंगी. पेयजल की व्यवस्था के लिए जल संस्थान को निर्देश दिए गए हैं. वहीं सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए सीमा सड़क संगठन को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाया जाए. इसके साथ ही यात्रा मार्गों पर कूड़ा प्रबंधन को भी बेहतर करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और यात्रियों को साफ-सुथरा माहौल मिल सके.


