कई हफ्तों तक पुलिस से बचती रही कुख्यात ‘ड्रग्स क्वीन’ कुसुम को आखिरकार 9 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने शाहदरा से गिरफ्तार कर लिया. यह ऑपरेशन करीब दो महीने तक चला, जिसमें दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में लगातार छापेमारी की गई.
50 हजार का इनाम, MCOCA के तहत थी वांछित
कुसुम पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित था और वह MCOCA के तहत वांछित अपराधी थी. वह पुलिस के लिए लंबे समय से एक चुनौती बनी हुई थी.
200 CCTV और 100 फोन रिकॉर्ड खंगाले
पुलिस ने उसकी तलाश में 200 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले और 100 से अधिक मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया. इसके बावजूद वह हर बार पुलिस को चकमा देने में सफल रही.
बचने के लिए अपनाती थी ये तरीके
कुसुम बेहद शातिर तरीके से काम करती थी. वह स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करती थी, लगातार ठिकाने बदलती रहती थी और नए सिम कार्ड का उपयोग करती थी, जिससे उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था.
शाहदरा में बिछाया गया जाल
9 अप्रैल को पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि कुसुम शाहदरा में दाखिल होने वाली है. पुलिस ने पहले से जाल बिछा रखा था.
हालांकि उसने आखिरी बार भागने की कोशिश की, लेकिन इस बार पुलिस ने उसे दबोच लिया.
परिवार चलाता था पूरा सिंडिकेट
पूछताछ में सामने आया कि कुसुम एक बड़े ड्रग्स सिंडिकेट की सरगना थी. इस नेटवर्क में उसके परिवार के सदस्य भी शामिल थे.
उसकी बेटियां दीपा और चिकू पहले ही गिरफ्तार हो चुकी हैं, जबकि भाई हरिओम और सहयोगी रवि भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे.
छोटे स्तर से बनी ‘ड्रग्स क्वीन’
कुसुम ने दिल्ली के सुल्तानपुरी से छोटे स्तर पर ड्रग्स सप्लाई शुरू की थी. धीरे-धीरे उसने अपना नेटवर्क बढ़ाया और कई राज्यों तक फैला दिया.
कई केस, सालों से फरार
रोहिणी कोर्ट द्वारा घोषित अपराधी कुसुम पर 2003 से 2024 के बीच NDPS एक्ट के तहत कम से कम 11 मामले दर्ज हैं. वह लंबे समय से फरार चल रही थी, लेकिन अब आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गई.


