ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है. देश के कई हिस्सों से एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण आपूर्ति पर दबाव जरूर बढ़ा है.
इसी बीच केंद्र सरकार ने उन परिवारों से पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG अपनाने की अपील की है, जिनके घर इसके नेटवर्क के पास हैं. सरकार का मानना है कि इससे एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और गैस की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी.
60 लाख परिवारों से PNG अपनाने की अपील
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि जिन इलाकों में PNG का ढांचा उपलब्ध है, वहां रहने वाले करीब 60 लाख परिवार इस सुविधा को अपना सकते हैं. इससे उन्हें बिना सिलेंडर के सीधे पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस मिलेगी.
उन्होंने कहा कि देश में करीब 33.37 करोड़ लोग एलपीजी का उपयोग करते हैं, जबकि लगभग 1.5 करोड़ उपभोक्ताओं को पहले से ही पाइप के जरिए गैस की आपूर्ति हो रही है.
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त चेतावनी
सरकार ने गैस सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों को सख्त चेतावनी दी है. अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का फायदा उठाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
इस संबंध में पेट्रोलियम और नागरिक आपूर्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य सरकारों के साथ बैठक कर उन्हें जमाखोरों पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
घरेलू एलपीजी उत्पादन में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी
सरकार ने बताया कि पांच मार्च के बाद से घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. इसके बावजूद लोगों में घबराहट के कारण गैस बुकिंग अचानक बढ़ गई है.
मंत्रालय के अनुसार पहले प्रतिदिन औसतन 55.7 लाख सिलेंडर की बुकिंग होती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में यह संख्या बढ़कर 75.7 लाख तक पहुंच गई है. सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी लोगों द्वारा घबराहट में की जा रही अतिरिक्त बुकिंग का परिणाम है.
जरूरी सेवाओं को दी जा रही प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे जरूरी क्षेत्रों को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दी जा रही है. वहीं होटलों और रेस्तरां जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए गैस आपूर्ति में कुछ कटौती की गई है.
केंद्र सरकार ने कॉमर्शियल गैस की कुल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सौंप दिया है, ताकि वे स्थानीय जरूरत के अनुसार इसकी प्राथमिकता तय कर सकें.
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का असर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ा है. ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है. इसके बंद होने से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर कई देशों की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ रहा है.


