पौड़ी गढ़वाल: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल और जिला प्रशासन के प्रयासों से जनपद में पशुपालन आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है. जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के मार्गदर्शन में पशुपालन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को पशुपालन से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की जा रही है.
बकरी, मुर्गी और गौ पालन से बढ़ रही आय
पशुपालन विभाग पौड़ी द्वारा बकरी पालन, मुर्गी पालन, गौ पालन सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में ग्रामीणों को लाभान्वित किया गया है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार गौ पालन योजना के तहत 143, बकरी पालन योजना में 262, महिला बकरी पालन योजना में 30, मुर्गी पालन में 120, नंदी पालन योजना में 6, गैर-सरकारी गौ सदन में 18 तथा सरकारी गौ सदन में 3 इकाइयों को योजनाओं का लाभ दिया गया है.
महिला बकरी पालन योजना से विधवा महिलाओं को सहारा
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि जिला योजना के तहत 262 लाभार्थियों को बकरी पालन योजना से जोड़ा गया है. इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी को 16 बकरियां उपलब्ध कराई जाती हैं.
उन्होंने बताया कि महिला बकरी पालन योजना के तहत 30 विधवा महिलाओं को चार-चार बकरियां दी गई हैं, जिससे वे अपने घर के पास ही पशुपालन कर आत्मनिर्भर बन सकें.
मुर्गी पालन से भी बढ़ रही आमदनी
डॉ. शर्मा ने बताया कि मुर्गी पालन योजना के अंतर्गत 120 लाभार्थियों को तीन-तीन हजार मुर्गियां उपलब्ध कराई गई हैं. इनसे उत्पादित मुर्गियां और बकरियों की आपूर्ति सीमा सुरक्षा बल श्रीनगर को भी की जाती है, जिससे लाभार्थियों को बाजार उपलब्ध हो रहा है और उनकी आय में वृद्धि हो रही है.
नंदी पालन और गौ सदनों को भी मिल रहा सहयोग
नंदी पालन योजना के तहत छह लाभार्थी पांच-पांच नंदियों का पालन कर रहे हैं. इनके भरण-पोषण के लिए सरकार की ओर से प्रति नंदी प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता दी जाती है.
इसके अलावा जनपद में 18 गैर-सरकारी गौ सदन संचालित हैं, जिनके संचालन के लिए प्रति गाय प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता दी जाती है. श्रीनगर, सतपुली और कोटद्वार में तीन सरकारी गौ सदन भी संचालित हैं.
पलायन रोकने में भी मिल रही मदद
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक ग्रामीणों को पशुपालन से जोड़कर उन्हें स्थायी स्वरोजगार उपलब्ध कराया जाए. इन योजनाओं से ग्रामीणों को अपने ही गांव में रोजगार मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ पलायन रोकने में भी मदद मिल रही है.


