ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की इजराइली हमले में मौत की खबर से उत्तराखंड के शिया समुदाय और कई मुस्लिम संगठनों में गहरा शोक और आक्रोश है. देहरादून, मंगलौर और विकासनगर समेत कई जगहों पर रविवार को विरोध प्रदर्शन हुए. लोगों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया.
देहरादून के ईसी रोड स्थित इमामबारगाह और मस्जिद में अंजुमन मोईनुल मोमिनीन की ओर से शोकसभा आयोजित की गई. इमाम मौलाना शहंशाह हुसैन जैदी ने कहा कि खामेनेई ने जीवन भर मजलूमों की आवाज उठाई. उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी. इंदर रोड के इमामबारगाह में भी बड़ी संख्या में लोग जुटे. मौलाना रजा शाह कुम्मी ने कहा कि उन्होंने अत्याचारियों के सामने कभी झुकना स्वीकार नहीं किया. कई लोगों ने कहा कि उन्हें यह दुख मुहर्रम के आशूरा जैसा महसूस हो रहा है.
विकासनगर में निकाला गया जुलूस
विकासनगर के अंबाड़ी क्षेत्र में नमाज के बाद मातमी जुलूस निकाला गया. जुलूस नेशनल हाईवे से होते हुए ईदगाह तक पहुंचा. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए. धर्मगुरुओं ने कहा कि खामेनेई सिर्फ ईरान के नहीं, बल्कि दुनिया भर के कमजोर लोगों के नेता थे.
महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन
मंगलौर के पठानपुरा और आसपास के इलाकों में महिलाओं ने भी प्रदर्शन किया. सैकड़ों महिलाएं काली पट्टी बांधकर और तस्वीरें लेकर सड़कों पर उतरीं. मौलाना इस्तखार हुसैन के नेतृत्व में लोगों ने विरोध जताया. प्रदर्शनकारियों ने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया.
पूरे क्षेत्र में पुलिस सतर्
हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित मदरसा अरबिया दारुल उलूम रशीदिया में अमन के लिए दुआ की गई. मदरसा प्रबंधक मौलवी आरिफ और स्कॉलर नईम कुरैशी ने ईरान और इजरायल के बीच तनाव खत्म होने की प्रार्थना की. उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों का खून नहीं बहना चाहिए और दुनिया में शांति बनी रहनी चाहिए. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में पुलिस सतर्क है. प्रदेश में शोकसभाएं और विरोध प्रदर्शन जारी हैं.


