उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूली की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है. राज्य के 11 प्रवेश बिंदुओं पर यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अब सीमा पर वाहन रोकने की जरूरत नहीं होगी. क्योंकि एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों के जरिए वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन की जा रही है, जैसे ही किसी वाहन का नंबर ट्रेस होता है. सॉफ्टवेयर अपने आप वाहन की श्रेणी पहचान लेता है और उसी आधार पर ग्रीन सेस की राशि फास्टैग से काट ली जाती है.
कोटद्वार के कौड़ियां बॉर्डर और हरिद्वार के नारसन बॉर्डर पर इस सिस्टम का ट्रायल किया गया था, जो सफल रहा. इसके बाद हरिद्वार, कोटद्वार, देहरादून और उधम सिंह नगर जिलों में कुल 11 स्थानों पर ग्रीन सेस वसूली शुरू कर दी गई है. हाल ही में कोटद्वार में प्रवेश करने वाले कुछ बाहरी राज्यों के वाहन चालकों को फास्टैग से पैसे कटने का मैसेज मिला, जिसके बाद इस विषय पर एआरटीओ कोटद्वार से जानकारी ली गई. अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया अब स्थायी रूप से लागू कर दी गई है और एएनपीआर कैमरों के माध्यम से ही ग्रीन सेस वसूला जाएगा.
बिना गाड़ी रोके कटेगा ग्रीन सेस
इस व्यवस्था के साथ उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहां सीमा पर बिना वाहन रोके ग्रीन सेस की वसूली की जा रही है, परिवहन विभाग ने बॉर्डर चेक पोस्ट के अलावा राज्य के भीतर भी कई स्थानों पर एएनपीआर कैमरे लगाए हैं. कुल 37 कैमरों के जरिए बाहरी वाहनों के फास्टैग से स्वतः ग्रीन सेस काटा जा रहा है.
18 लाख राजस्व रोज मिल रहा
इस नई प्रणाली से राज्य को रोजाना करीब 18 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है. वहीं, सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान लगाया जा रहा है. यदि कोई वाहन ग्रीन सेस में छूट की श्रेणी में नहीं आता है, तो सॉफ्टवेयर फास्टैग से राशि काट देता है और इसकी सूचना वाहन से जुड़े मोबाइल नंबर पर मैसेज के जरिए भेज दी जाती है.


