उत्तराखंड अब हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर खुद को एप्पल स्टेट के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है. सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई नई पहल कर रही है. इन प्रयासों से पहाड़ी इलाकों में सेब उत्पादन की रफ्तार दोगुनी होने की उम्मीद है.
राज्य सरकार ने वर्ष 2030-31 तक सेब का सालाना टर्नओवर 2000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. वर्तमान में राज्य में सेब का सालाना टर्नओवर लगभग 300 से 350 करोड़ रुपये है. सरकार का मानना है कि नई योजनाओं से जहां बागवानों की आय बढ़ेगी, वहीं उत्तराखंड देश में सेब उत्पादन का एक नया हब बनकर उभरेगा.
कितना होता है प्रोडक्शन
सेब उत्पादन के मामले में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बाद उत्तराखंड तीसरे स्थान पर है. राज्य में इस समय 11766.72 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती की जा रही है और कुल उत्पादन 44100.05 मीट्रिक टन है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य बड़े राज्यों से प्रतिस्पर्धा के लिए अभी और प्रयास करने की जरूरत है.
सरकार ने किया बड़ा फैसला
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अति सघन बागवानी को बढ़ावा देने का फैसला किया है. साथ ही उच्च गुणवत्ता वाली पौध की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. अति सघन बागवानी के तहत कम क्षेत्र में अधिक पौधे लगाए जाते हैं. इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन तीन से चार गुना तक बढ़ सकता है. पारंपरिक बागानों की जगह इटली और नीदरलैंड की तर्ज पर आधुनिक तकनीक अपनाने की योजना है. इसके लिए स्पर और पारंपरिक किस्मों की उच्च गुणवत्ता वाली पौध की जरूरत होगी.
फिलहाल राज्य में उद्यान विभाग के तहत सेब की 40 नर्सरियां संचालित हैं. इसके अलावा निजी क्षेत्र की भी कई नर्सरियां हैं. फिर भी उच्च बागवानी के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने में चुनौतियां बनी हुई हैं. कई बार अन्य राज्यों या विदेशों से पौध मंगानी पड़ती है.
आधुनिक नर्सरियां होंगी विकसित
इस कमी को दूर करने के लिए अब सेब की अत्याधुनिक नर्सरी विकास योजना शुरू की गई है. इसके तहत सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में आधुनिक नर्सरियां विकसित की जाएंगी. लक्ष्य यह है कि स्थानीय परिस्थितियों में तैयार की गई बेहतर गुणवत्ता की पौध किसानों को आसानी से मिल सके. निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए उच्च घनत्व वाली सेब नर्सरी स्थापित करने पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान देने की व्यवस्था की गई है.
क्या होगा योजना का फायदा
उद्यान सचिव डॉ एसएन पांडेय के अनुसार इस योजना को तेजी से जमीन पर उतारा जाएगा. सरकार की कोशिश है कि साल 2030-31 तक उत्तराखंड सेब उत्पादन के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बनाए. साथ ही सालाना टर्नओवर को 2000 करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाए. इस पहल से पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गांवों से हो रहे पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी.


