उत्तराखंड में 1 अप्रैल से बिजली और पानी की दरों में बदलाव लागू होने जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ सकता है. राज्य में पानी की दरों में हर साल की तरह इस बार भी बढ़ोतरी की जा रही है. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पानी की दरों में 9 प्रतिशत की वृद्धि तय की गई है, जबकि व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी 15 प्रतिशत होगी.
पानी की दरों में यह बढ़ोतरी 2013 में तय किए गए बेस रेट के आधार पर की जाती है. शहरी क्षेत्रों में जल संस्थान पानी के बिल का निर्धारण भवन कर मूल्य के आधार पर करता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का बिल एक तय दर के अनुसार लिया जाता है. वर्तमान में ग्रामीण इलाकों में पानी का मासिक बिल 117 रुपये है, जो बढ़कर 121 रुपये प्रति माह हो जाएगा. वहीं शहरी क्षेत्रों में पानी का बिल 360 रुपये से बढ़कर 373 रुपये प्रति माह हो जाएगा. इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के मासिक खर्च पर पड़ेगा.
बिजली की दरों को लेकर फैसला आना बाकी
दूसरी ओर, बिजली की दरों को लेकर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है. विद्युत नियामक आयोग 31 मार्च को नई बिजली दरों की घोषणा करेगा. हालांकि, इस साल चुनावी माहौल को देखते हुए बिजली की दरों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम मानी जा रही है. सरकार और संबंधित विभाग इस बात का ध्यान रख सकते हैं कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े.
पिछले साल कितनी बढ़ोतरी हुई?
पिछले वर्ष 2025 में राज्य में बिजली दरों में 5.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी. उस समय यूपीसीएल ने 12.01 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव रखा था, लेकिन नियामक आयोग ने कम बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 33 पैसे प्रति यूनिट, व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 42 पैसे प्रति यूनिट और लघु उद्योगों के लिए 36 पैसे प्रति यूनिट की दर से बढ़ोतरी लागू की गई थी.
इस वर्ष बिजली उपभोक्ताओं पर दोहरा असर पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है. 31 मार्च को जहां सालाना बिजली दरों की घोषणा होगी, वहीं अप्रैल के पहले सप्ताह में फ्यूल पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट की नई दरें भी जारी की जाएंगी. यह दरें पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रही हैं, जिससे बिजली बिल में अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है.
जल्द नई दरें होंगी घोषित
विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद ने बताया कि बिजली दरों से जुड़े प्रस्तावों का अध्ययन किया जा चुका है और जल्द ही नई दरें घोषित कर दी जाएंगी, जो अप्रैल से प्रभावी होंगी. वहीं जल संस्थान के सीजीएम डीके सिंह के अनुसार, हर साल की तरह इस बार भी 1 अप्रैल से पानी के बिलों में बढ़ोतरी लागू कर दी जाएगी. इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं को अपने मासिक बजट में बदलाव करना पड़ सकता है, क्योंकि जरूरी सेवाओं की लागत में यह वृद्धि सीधे असर डालेगी.


