भारतीय घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक हाशिये पर रहने वाली जम्मू-कश्मीर की टीम ने शनिवार को इतिहास रच दिया. कप्तान पारस डोगरा द्वारा दोपहर 2:10 बजे पारी घोषित करते ही तस्वीर साफ हो गई थी. अब जम्मू-कश्मीर अंडरडॉग नहीं रहा. आठ बार की चैंपियन कर्नाटक पर पहली पारी की बढ़त के साथ जीत दर्ज कर टीम चैंपियन बन चुकी थी. यह सिर्फ जीत नहीं थी, बल्कि दशकों की मेहनत, धैर्य और विश्वास का फल थी.
1959 से अब तक का इंतज़ार खत्म
1959 में शुरू हुए रणजी सफर के बाद पहली बार यह यूनियन टेरिटरी अपने नाम एक खिताब दर्ज करा पाई. सीमित संसाधनों, बुनियादी ढांचे की कमी और व्यवस्थागत चुनौतियों के बावजूद टीम ने यह साबित कर दिया कि वे शीर्ष स्तर पर जगह बनाने के हकदार हैं. यह पल घाटियों और मैदानों से आए खिलाड़ियों की सामूहिक जिद और आत्मविश्वास की पहचान बन गया.
हूबली में ऐतिहासिक गवाह
हूबली में खेले गए फाइनल के दौरान प्रशासनिक और राजनीतिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं. उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि कैसे जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों ने जीवन भर याद रहने वाला इतिहास रच दिया. मैच के पांचों दिन टीम का दबदबा साफ नजर आया.
इकबाल-लोतरा की यादगार साझेदारी
क़मरान इकबाल और साहिल लोत्रा ने दूसरी पारी में नाबाद 197 रन की साझेदारी कर मुकाबले पर पूरी तरह पकड़ बना ली. इकबाल ने रात भर 94 रन पर टिके रहने के बाद 72वें ओवर में शानदार शतक पूरा किया. यह उनके प्रथम श्रेणी करियर का दूसरा शतक था. सीनियर बल्लेबाज़ शुभम खजूरिया के चोटिल होने के बाद अचानक टीम में आए इकबाल ने सीधे फ्लाइट से मैदान पहुंचकर नाबाद 160 रन बनाकर अपनी पारी को और खास बना दिया.
लोतरा का ऑल-राउंड कमाल
जैसे-जैसे टीम ने पारी घोषित करने की तैयारी की, कर्नाटक पर बढ़त 584 रन तक पहुंच चुकी थी. इसी दौरान साहिल लोत्रा ने भी शतक पूरा किया. चोटिल वंशज शर्मा की जगह उतरे लोत्रा ने दूसरी पारी में नाबाद शतक, पहली पारी में 72 रन और गेंदबाज़ी में 1/50 के आंकड़े दर्ज कर ऑल-राउंड प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया.
कर्नाटक पर पूरी तरह दबदबा
यह दिन कर्नाटक के लिए विकेट के लिहाज़ से सूखा रहा. टीम को एक दिन पहले ही हार का अंदेशा हो गया था. वे बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी दोनों में पूरी तरह पिछड़ते नजर आए.
कोच का इमोशनल रिएक्शन
मैच के बाद कोच अजय शर्मा ने कहा कि देशभर में लोग जम्मू-कश्मीर की जीत देखना चाहते थे. उन्होंने पिछले सीज़न में केरल के खिलाफ क्वार्टर-फाइनल में एक रन से मिली हार को याद करते हुए कहा कि उस अनुभव ने टीम को छोटे अंतर का महत्व सिखाया और वही सीख इस जीत की नींव बनी.
सीज़न के सितारे
औकिब नबी ने पूरे टूर्नामेंट में 60 विकेट लेकर टीम के प्रमुख विकेट-टेकर का सम्मान पाया, जबकि पहली पारी में पांच विकेट भी झटके. वहीं अब्दुल समद ने सीज़न में 749 रन बनाकर टीम के सबसे सफल बल्लेबाज़ के रूप में अभियान समाप्त किया.यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के आत्मसम्मान और भविष्य की नई शुरुआत का प्रतीक है.


