देहरादून में 27 फरवरी को सिविल सर्विस इंस्टीट्यूट, देहरादून में ग्राम्य विकास सचिव धीराज गर्ब्याल की अध्यक्षता में जनपदों के मुख्य विकास अधिकारियों के साथ ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक का केंद्र बिंदु ग्रामीण आजीविका, स्वरोजगार और पलायन रोकने की ठोस रणनीति रहा.
पलायन रोकने के लिए जनपदवार ठोस रणनीति
सचिव गर्ब्याल ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद पलायन रोकने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए वृहद एवं व्यवहारिक रणनीति तैयार करे. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित कर ही युवाओं को अपने गांवों से जोड़े रखा जा सकता है.
प्रमुख योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा
बैठक में एनआरएलएम, महात्मा गांधी नरेगा, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना, मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम, मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना सहित केंद्र व राज्य पोषित योजनाओं तथा वाह्य सहायतित योजना ग्रामोत्थान की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई. अधिकारियों को श्रम, कौशल विकास और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए.
लखपति दीदी और स्वयं सहायता समूहों पर जोर
उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अधिक से अधिक लखपति दीदी तैयार करने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए. सचिव ने एनआरएलएम समूहों को मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से तकनीकी सहयोग देने और उनके कृषि आधारित उत्पादों के विपणन में एनओपी और एनपीओपी प्रमाणन प्रक्रिया को सरल व प्रभावी बनाने पर बल दिया.
युवाओं के कौशल विकास से जुड़े निर्देश
आरसेटी और डी.डी.यू.जी.के.वाई. के तहत युवाओं को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए सक्रिय प्रयास करने को कहा गया. सभी जनपदों को इच्छुक युवाओं का चिन्हांकन कर राज्य के भीतर उद्योगों में रोजगार उपलब्ध कराने हेतु स्किल गैप एनालिसिस कराने के निर्देश दिए गए.
स्वरोजगार से जुड़े अवसर बढ़ाने पर सहमति
मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना की समीक्षा के बाद सचिव ने कहा कि अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना समय की आवश्यकता है. उन्होंने विकासखंड स्तर पर वार्षिक लाभार्थियों की सूची तैयार करने को कहा, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से हो सके.
ग्रोथ सेंटर और हाउस ऑफ हिमालयाज पर चर्चा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रोथ सेंटरों को सशक्त करने और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उन्हें पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए गए. बैठक में हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के तहत सामुदायिक संगठनों द्वारा तैयार प्रीमियम उत्पादों के विपणन पर भी चर्चा हुई. सचिव ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं और किसानों के समूहों की आय बढ़ाना और उत्पादों की गुणवत्ता व पैकेजिंग में सुधार करना है.
तय समय सीमा में कार्य योजना बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना और मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम की समीक्षा के बाद सभी जनपदों को निर्देश दिए गए कि 25 मार्च 2026 तक दोनों योजनाओं के अंतर्गत वार्षिक कार्य योजनाएं तैयार कर राज्य सरकार को स्वीकृति हेतु भेजी जाएं.
वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में अपर सचिव एवं आयुक्त ग्राम्य विकास श्रीमती अनुराधा पाल, अपर सचिव सुश्री झरना कमठान सहित अन्य वरिष्ठ राज्य अधिकारी उपस्थित रहे. अधिकारियों ने अपने जनपदों की बेस्ट प्रैक्टिस और सफलता की कहानियां साझा कीं, जो ग्रामीण विकास को नई दिशा देने में सहायक होंगी.


