उत्तराखंड की आस्था और पर्यटन की सबसे बड़ी धुरी मानी जाने वाली चार धाम यात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. इस बार यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 6 मार्च से शुरू किया जाएगा. पर्यटन विभाग रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहा है. फिलहाल ऑनलाइन पंजीकरण के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है.
ऑनलाइन और ट्रैवल व्यवस्थाओं पर फोकस
पर्यटन विभाग के अनुसार, इस बार यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रजिस्ट्रेशन और ट्रैवल मैनेजमेंट को पहले से ज्यादा व्यवस्थित किया जा रहा है. यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो.
ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की भी होगी सुविधा
जो श्रद्धालु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाएंगे, उनके लिए ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पहले ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होगा. इसके लिए 20 टीमें बनाई गई हैं, जो होटलों, आश्रमों और धर्मशालाओं में ठहरे ग्रुप में आने वाले श्रद्धालुओं की बुकिंग और पंजीकरण में मदद करेंगी.
हर साल लाखों श्रद्धालु करते हैं दर्शन
हर साल करीब 50 लाख श्रद्धालु चार धाम यात्रा पर आते हैं. सरकार को उम्मीद है कि इस बार यात्रियों की संख्या पिछले वर्षों के मुकाबले और अधिक हो सकती है. इसी को देखते हुए प्रशासन भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है.
कब खुलेंगे चार धाम के कपाट?
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खोले जाएंगे. इसके बाद केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे. परंपरा के अनुसार, बद्रीनाथ मंदिर की तिथि बसंत पंचमी और केदारनाथ मंदिर की तिथि महाशिवरात्रि के दिन घोषित की जाती है.
मंदिर परिसरों में मोबाइल और कैमरे पर रोक
इस साल चार धाम के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरे पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे. पिछले वर्षों में मोबाइल और कैमरे के कारण दर्शन व्यवस्था में दिक्कतें सामने आई थीं. इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसरों में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने पर रोक लगाने का फैसला किया गया है. इस संबंध में हाल ही में जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और संबंधित विभागों के साथ बैठक भी की जा चुकी है.


