मौसम में बदलाव के साथ ही उत्तराखंड में बिजली व्यवस्था पर दबाव साफ नजर आने लगा है. ऊर्जा विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च महीने में राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला. इस कमी को पूरा करने के लिए बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ी, जिससे स्थिति को अस्थायी तौर पर संभाला गया. हालांकि, आने वाले महीनों में गर्मी बढ़ने के साथ यह दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
आंकड़ों के अनुसार, मार्च में राज्य का कुल बिजली उत्पादन, हाइड्रो शेयर को छोड़कर, 218.30 मिलियन यूनिट रहा. वहीं, केंद्रीय हिस्सेदारी और अन्य स्रोतों को मिलाकर कुल उपलब्धता 587.88 मिलियन यूनिट तक पहुंची. इसके बावजूद राज्य की कुल बिजली मांग 1079.92 मिलियन यूनिट दर्ज की गई. इस तरह पूरे महीने में लगभग 492.03 मिलियन यूनिट की भारी कमी सामने आई, जो ऊर्जा क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है.
बिजली की मांग में तेजी से उछाल
मार्च के दौरान बिजली की मांग में तेजी से उछाल देखने को मिला. इसके पीछे बढ़ता तापमान, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी और सिंचाई की जरूरतें मुख्य कारण रहे. वहीं दूसरी ओर, जलस्तर में कमी के चलते हाइड्रो प्रोजेक्ट्स का उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे संकट और गहरा गया. उत्पादन घटने और मांग बढ़ने के इस असंतुलन ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को चुनौतीपूर्ण बना दिया.
इस अतिरिक्त बिजली खरीद का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि महंगी दरों पर खरीदी गई बिजली का भार अंततः लोगों को अपने बिजली बिल के रूप में उठाना पड़ेगा. इसी के चलते अप्रैल से फ्यूल और बिजली खरीद सरचार्ज लागू कर दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है.
प्रतिदिन कितनी मांग
अगर दैनिक औसत की बात करें तो राज्य में प्रतिदिन करीब 40 मिलियन यूनिट बिजली की मांग रही, जबकि उपलब्धता केवल लगभग 21.77 मिलियन यूनिट तक सीमित रही. खास बात यह रही कि मार्च के दूसरे पखवाड़े में स्थिति और ज्यादा खराब हो गई. 12 मार्च के बाद कई दिनों तक राज्य का उत्पादन घटकर केवल 6 से 7 मिलियन यूनिट रह गया, जबकि मांग 42 से 44 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई.
12 मार्च को स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रही, जब राज्य को 21.53 मिलियन यूनिट की भारी कमी का सामना करना पड़ा. इस दौरान 15.12 मिलियन यूनिट बिजली बाजार से खरीदनी पड़ी. पूरे महीने में पावर एक्सचेंज से 150.39 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई, जबकि अन्य राज्यों से बैंकिंग व्यवस्था के जरिए 341.02 मिलियन यूनिट बिजली ली गई.
इसके अलावा, कुछ दिनों में ओवरड्रा और अंडरड्रा के जरिए ग्रिड का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई. कुल मिलाकर, बिजली की बढ़ती मांग और घटते उत्पादन ने उत्तराखंड की ऊर्जा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जिसका असर आने वाले समय में और भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है.


