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उत्तराखंड की बदलती सर्दियां: कम बारिश और बिगड़ी टाइमिंग से किसानों की बढ़ी मुश्किलें

Mintwire by Mintwire
17/04/2026
in ब्लॉग
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उत्तराखंड की सर्दियां अब पहले जैसी नहीं रहीं. जहां दिसंबर और जनवरी में कभी नियमित बारिश और बर्फबारी होती थी, अब ये महीने सूखे गुजर रहे हैं. किसानों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि बारिश समय पर नहीं हो रही, जिससे फसलों को जरूरी नमी नहीं मिल पा रही.

बारिश में भारी गिरावट

हाल के वर्षों में सर्दियों की बारिश में तेज गिरावट दर्ज की गई है. आंकड़ों के अनुसार, 2021 में जहां करीब 182 मिमी बारिश हुई थी, वहीं 2024 में यह घटकर लगभग 12 मिमी रह गई. कई इलाकों में 2025 की सर्दियों में तो बारिश और बर्फबारी लगभग न के बराबर रही.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बदलाव Western Disturbances के कमजोर पड़ने और उनके ट्रैक बदलने की वजह से हो रहा है.

देर से बारिश बन रही नुकसान की वजह

समस्या सिर्फ कम बारिश की नहीं है, बल्कि उसकी टाइमिंग भी बिगड़ गई है.
रबी फसलें जैसे गेहूं और जौ को शुरुआती सर्दियों में नमी चाहिए होती है, लेकिन अब बारिश फरवरी या मार्च में हो रही है. इससे:

  • फसलें गिर जाती हैं
  • बीमारियां बढ़ती हैं
  • उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं

यानी जो बारिश मदद करनी चाहिए, वही नुकसान का कारण बन रही है.

बर्फबारी में भी आई कमी

पहाड़ों में बर्फबारी पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत होती है. यह धीरे-धीरे पिघलकर जमीन और जल स्रोतों को पानी देती है.
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बर्फबारी में भी गिरावट आई है. कई जगहों पर जहां पहले फीट में बर्फ गिरती थी, अब वहां बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो रही.

जल संकट की शुरुआत सर्दियों से

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में जो पानी की कमी देखने को मिलती है, उसकी शुरुआत सर्दियों से ही हो जाती है.
कम बारिश और बर्फबारी के कारण:

  • झरने जल्दी सूख जाते हैं
  • भूजल recharge नहीं हो पाता
  • गांवों में पानी की किल्लत बढ़ जाती है

इस तरह सर्दियों की कमी सीधे गर्मियों के जल संकट में बदल जाती है.

खेती बनती जा रही जोखिम भरी

पहले किसान मौसम के एक तय पैटर्न के अनुसार खेती करते थे, लेकिन अब वह भरोसा टूट रहा है.
हर सीजन अनिश्चित होता जा रहा है—कभी बारिश नहीं, कभी देर से, तो कभी नुकसान पहुंचाने वाली. इससे खेती एक तरह का जुआ बनती जा रही है.

विशेषज्ञों की चेतावनी

India Meteorological Department सहित कई संस्थान हिमालयी राज्यों में लगातार सर्दियों की कमी की चेतावनी दे चुके हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, तापमान में वृद्धि और वायुमंडलीय बदलाव इसके पीछे मुख्य कारण हैं.

धीरे-धीरे गहराता संकट

यह कोई अचानक आई आपदा नहीं, बल्कि एक धीरे-धीरे बढ़ता संकट है.
कम उत्पादन, बढ़ती निर्भरता, पलायन और पानी की कमी—ये सभी संकेत हैं कि पहाड़ों में एक बड़ा बदलाव हो रहा है.

उत्तराखंड में सर्दियां अब मौजूद तो हैं, लेकिन उनका स्वभाव बदल चुका है. और जब मौसम ही भरोसेमंद न रहे, तो सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है, जिनकी जिंदगी पूरी तरह उसी पर निर्भर है—यानी किसान.

Tags: UttarakhandUttarakhand newsUttarakhand news hindi
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