देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल के सभी मदरसों में जांच के आदेश दिए गए हैं. राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक सत्यापन अभियान चलाएं.
बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, पारदर्शिता और नियमों का पालन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
बाहरी राज्यों के बच्चों पर जांच
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए यह मामला सामने आया है कि बाहरी राज्यों से बच्चों को मदरसों में लाया जा रहा है.
इसको देखते हुए शासन ने निर्देश दिए हैं कि बच्चों के स्रोत, अभिभावकों की सहमति और उन्हें लाने वाले व्यक्तियों की गहन जांच की जाए.
विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई
अधिकारियों को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.
इसमें सभी पहलुओं की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है.
राज्य में 452 पंजीकृत मदरसे
प्रदेश में फिलहाल 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हो रहे हैं.
सरकार ने वर्ष 2025 में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू किया है.
नई व्यवस्था 2026 से लागू होगी
नई व्यवस्था के तहत 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा. इसके बाद सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा.
कुल मिलाकर, सरकार मदरसों में पारदर्शिता और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाती नजर आ रही है.


