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गौलापार टैंक हादसा: एक ही परिवार के तीन लोगों का अंतिम संस्कार, घर में पसरा मातम

Mintwire by Mintwire
23/07/2026
in उत्तराखंड, राज्य
0

हल्द्वानी के गौलापार टैंक हादसे के बाद बिष्ट परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जहरीली गैस की चपेट में आने से जान गंवाने वाली सरस्वती देवी और उनके दोनों बेटों धर्मेंद्र बिष्ट व खुशाल बिष्ट का बुधवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक ही परिवार के तीन शव घर पहुंचते ही पूरे गांव में मातम छा गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार परिवार को सांत्वना देने पहुंचे, लेकिन आंगन में एक साथ तीन शव देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।

9 साल के बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि

पोस्टमार्टम के बाद तीनों शवों को अंतिम संस्कार के लिए सूर्या देवी मंदिर के पास स्थित पारंपरिक घाट ले जाया गया। यहां बिरादरी के लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान धर्मेंद्र के नौ वर्षीय बेटे चिराग ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह मार्मिक दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए।

दो बहुओं की चीख-पुकार से गूंज उठा आंगन

घर पर धर्मेंद्र की पत्नी ज्योति और खुशाल की पत्नी हिमानी का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजन और गांव की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश करती रहीं। बताया जा रहा है कि खुशाल की पत्नी हिमानी गर्भवती हैं, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।

जहरीली गैस बनी मौत की वजह

मंगलवार शाम निर्माणाधीन टैंक के अंदर बनी जहरीली गैस की चपेट में आने से सरस्वती देवी और उनके दोनों बेटों की मौत हो गई थी। घटना के बाद तीनों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

‘दादी, इन्हें बचाकर घर लाना’… नहीं लौटी तीनों की सांसें

घटना के बाद जब ग्रामीण तीनों को अस्पताल ले जा रहे थे, तब खुशाल की गर्भवती पत्नी हिमानी ने समाजसेवी नीरज रैक्वाल से कहा था, “दादी, इन्हें बचाकर घर लाना।” लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके।

अगले दिन गांव जाना था, उससे पहले हो गया हादसा

परिजनों के मुताबिक, धर्मेंद्र और खुशाल बुधवार को अपने पैतृक गांव कौंता जाने वाले थे, जहां 24 जुलाई से धार्मिक आयोजन शुरू होना था। समय की कमी के चलते दोनों ने मंगलवार शाम ही टैंक की शटरिंग हटाने का फैसला किया, लेकिन यह फैसला उनकी जिंदगी का आखिरी साबित हुआ।

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