प्रयागराज के यमुनापार इलाके में लगातार बढ़ रहे जलस्तर से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कोरांव तहसील क्षेत्र में बेलन नदी का जलस्तर बढ़ने से तीन रपटा डूब गए हैं। इसके चलते करीब 22 गांवों का संपर्क टूट गया है और लगभग 40 हजार लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
बेलन के साथ टोंस, टुड़ियारी, गोरमा और लपरी नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। कई गांवों में नालों के रास्ते बाढ़ का पानी घुसने लगा है। प्रशासन को आशंका है कि पहाड़ी नदियों का जलस्तर अभी और बढ़ सकता है।
मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने तहसील प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
बेलन नदी उफान पर, एक दर्जन गांव प्रभावित
सोनभद्र से निकलने वाली बेलन नदी प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में टोंस नदी में मिलती है। पिछले चार दिनों से नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था, लेकिन रविवार से इसमें तेजी आई और सोमवार को नदी उफान पर पहुंच गई।
रतेवरा-बड़ोखर मार्ग पर भोगन के पास बना रपटा डूब गया है। रपटा के ऊपर करीब 10 फीट पानी बह रहा है। इसके कारण भोगन, मनीपुर, लखनपुर, खिवली, लौआ कोन, तिवारीपुर, बांसघाट, टुड़ियार और बड़ोखर समेत करीब एक दर्जन गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
टुड़ियारी नदी का जलस्तर बढ़ने से हरदिहा-भगवानपुर गांव के पास स्थित रपटा भी पानी में डूब गया। इससे बैठकवा, देवघाट और संसारपुर समेत करीब 10 गांवों का संपर्क टूट गया है।
गांवों में भेजी जा रही जरूरी सुविधाएं
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एसडीएम कोरांव टी. प्रसाद ने अधिकारियों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा किया। कोटेदारों को जरूरत के अनुसार खाद्यान्न उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
लेखपालों को विशेष परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए नाव की व्यवस्था करने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित गांवों में मेडिकल कैंप लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
टोंस नदी का जलस्तर भी बढ़ा
मध्य प्रदेश के सतना से निकलने वाली टोंस नदी रीवा और चाकघाट होते हुए प्रयागराज के बारा क्षेत्र में प्रवेश करती है। इसके बाद मेजा और करछना होते हुए यह गंगा में मिलती है।
पिछले चार दिनों में टोंस नदी का जलस्तर करीब साढ़े तीन मीटर बढ़ चुका है। इससे नदी के आसपास के इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
बेलन नदी में डूबने से युवक की मौत
कोरांव के खिवली कला गांव निवासी 22 वर्षीय मोनू चौबे पुत्र आदित्य चौबे की शनिवार को बेलन नदी में डूबने से मौत हो गई थी। उसका शव रविवार को बरामद हुआ।
सोमवार शाम तक हादसे के करीब 48 घंटे बाद भी परिवार को आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी थी। परिजनों का आरोप है कि तहसील प्रशासन और आपदा राहत विभाग की ओर से मदद में देरी हुई, जबकि मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
तहसीलदार पर भड़का महिलाओं का गुस्सा
मोनू चौबे की मौत के बाद स्थानीय महिलाओं का गुस्सा तहसीलदार कोरांव रोशनी सोलंकी पर भी फूटा। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाएं तहसीलदार को खरी-खोटी सुनाती नजर आ रही हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सूचना मिलने के बावजूद तहसील प्रशासन शनिवार शाम काफी देर से मौके पर पहुंचा। इसके अलावा रपटा पर लोक निर्माण विभाग की ओर से रेलिंग नहीं लगाए जाने को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। बताया जा रहा है कि इसी रपटा से मोनू साइकिल समेत नदी में गिर गया था।


