India Today-CVoter के Mood of the Nation (MOTN) सर्वे में Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया है। सर्वे में दिपके को प्रधानमंत्री पद के लिए 1.3% लोगों ने पसंद किया, जबकि केजरीवाल को 1.2% लोगों का समर्थन मिला।
सिर्फ 0.1% का अंतर, लेकिन चर्चा बड़ी
दिपके और केजरीवाल के बीच अंतर भले ही सिर्फ 0.1 प्रतिशत अंक का है, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह आंकड़ा खासा चर्चा में है। दिपके कभी अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की कम्युनिकेशन टीम से जुड़े थे। उन्होंने 2020 से 2023 के बीच AAP के साथ काम किया था। अब वह CJP के जरिए युवा मुद्दों को उठाने वाले चेहरे के तौर पर सामने आए हैं।
मोदी सबसे आगे, राहुल गांधी दूसरे नंबर पर
सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे पसंदीदा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने हुए हैं। उन्हें 48.7% लोगों ने अगला प्रधानमंत्री देखने की इच्छा जताई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 27.1% के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय 9.2% के साथ तीसरे स्थान पर हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 2%, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को 1.7% और अभिजीत दिपके को 1.3% समर्थन मिला।
केजरीवाल 1.2% पर, दिपके से पीछे
प्रधानमंत्री पद की पसंद में अरविंद केजरीवाल 1.2% के साथ दिपके से पीछे रहे। हालांकि दोनों के आंकड़े शीर्ष दावेदारों की तुलना में काफी कम हैं, लेकिन दिपके का अपने पूर्व राजनीतिक बॉस से आगे निकलना सर्वे का एक दिलचस्प पहलू रहा।
विपक्ष का नेतृत्व कौन करे? राहुल गांधी सबसे आगे
जब लोगों से पूछा गया कि मौजूदा विपक्षी नेताओं में विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त कौन है, तो राहुल गांधी 29% के साथ पहले स्थान पर रहे। जनवरी 2026 के सर्वे में उनका आंकड़ा 28.6% था।
वहीं विजय ने पहली बार इस सूची में जगह बनाते हुए 12.2% के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। ममता बनर्जी 8.5% के साथ तीसरे और अरविंद केजरीवाल 7.5% के साथ चौथे स्थान पर रहे।
कैसे चर्चा में आए अभिजीत दिपके?
करीब 30 वर्षीय अभिजीत दिपके उस समय चर्चा में आए जब भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की बेरोजगार युवाओं पर कथित टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद हुआ। इसके बाद दिपके ने मई में ‘Cockroach Janta Party’ नाम से एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म/आंदोलन शुरू किया।
शुरुआत में यह पहल सोशल मीडिया पर व्यंग्य के तौर पर सामने आई, लेकिन बाद में युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर इसका दायरा बढ़ता गया।
NEET-UG पेपर लीक को बनाया बड़ा मुद्दा
CJP ने NEET-UG 2026 पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। संगठन ने 6 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही और इस्तीफे की मांग की।
यह आंदोलन करीब 45 दिनों तक चला और इसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस दौरान 26 दिनों तक उपवास किया।
‘School Thik Karo’ अभियान पर फोकस
जंतर-मंतर के आंदोलन के बाद CJP ने खुद को एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर आगे बढ़ाया। 15 अगस्त से शुरू किए गए ‘School Thik Karo’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की स्थिति का ऑडिट करने और उनकी व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की जा रही है।
AAP से पुराने रिश्ते को लेकर उठते रहे सवाल
अभिजीत दिपके के AAP से पुराने संबंधों को लेकर भी राजनीतिक विवाद रहा है। दिपके के 2020 से 2023 तक AAP की कम्युनिकेशन टीम के साथ काम करने की बात सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं और CJP के आलोचकों ने संगठन को AAP से जुड़ा हुआ बताया।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे समेत कुछ बीजेपी नेताओं ने दिपके और CJP को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि CJP खुद को युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित आंदोलन के रूप में पेश करता है।
MOTN में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी भी बड़े मुद्दे
अगस्त 2026 के MOTN सर्वे में 43% लोगों ने कहा कि NDA सरकार के दौरान भ्रष्टाचार बढ़ा है। वहीं बेरोजगारी को NDA सरकार की सबसे बड़ी विफलता के तौर पर बताया गया। ये दोनों मुद्दे CJP के जंतर-मंतर आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में भी शामिल रहे हैं।
25 हजार से ज्यादा लोगों से हुआ सर्वे
Mood of the Nation का अगस्त 2026 संस्करण CVoter ने किया। इसमें 1 जुलाई से 25 अगस्त के बीच 25,184 लोगों से सीधे बातचीत की गई। इसके अलावा पिछले छह महीनों में CVoter के नियमित ट्रैकिंग सर्वे के दौरान किए गए 91,795 इंटरव्यू को भी आंकड़ों में शामिल किया गया।
दिपके के लिए क्यों खास है 1.3%?
प्रधानमंत्री पद की पसंद में 1.3% का आंकड़ा नरेंद्र मोदी के 48.7% या राहुल गांधी के 27.1% के मुकाबले काफी छोटा है। लेकिन एक ऐसे राजनीतिक चेहरे के लिए, जिसने कुछ ही समय पहले व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया पहल के जरिए पहचान बनाई, केजरीवाल से 0.1 प्रतिशत अंक आगे निकलना जरूर चर्चा का विषय बन गया है।


