झारखंड के रांची के रहने वाले 29 वर्षीय अमरदीप कुमार की कहानी देश के उन खिलाड़ियों की मुश्किलों को सामने लाती है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, लेकिन खेल के मैदान से बाहर आने के बाद उन्हें अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अमरदीप ने थ्रोबॉल में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए चार अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। इसके बावजूद आज वह परिवार का पेट पालने के लिए सब्जी बेचने और कैब चलाने को मजबूर हैं।
मलेशिया, नेपाल और रांची में दिलाया भारत को गौरव
अमरदीप कुमार ने अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की ओर से शानदार प्रदर्शन किया। मलेशिया और नेपाल में आयोजित प्रतियोगिताओं के अलावा रांची में हुई प्रतियोगिता में भी उन्होंने देश की टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। उनके नाम चार अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक हैं।
खेल के मैदान पर मिली सफलता के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में वह बदलाव नहीं आया, जिसकी उम्मीद एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कर सकता है। खेल को अपना करियर बनाने वाले अमरदीप को नियमित रोजगार का इंतजार करना पड़ा।
अब अरगोड़ा चौक पर बेचते हैं सब्जियां
आर्थिक परेशानियों के बीच अमरदीप ने परिवार का खर्च चलाने के लिए रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचने का काम शुरू किया। इसके साथ ही वह कैब भी चलाते हैं। जिस खिलाड़ी ने कभी देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मैदानों पर पदक जीते, उसे आज रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई तरह के काम करने पड़ रहे हैं।
उनकी स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को खेल के बाद रोजगार और आर्थिक सुरक्षा कितनी मिल पाती है।
खेल यात्राओं के लिए लेना पड़ा कर्ज
अमरदीप की मुश्किलें सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं रहीं। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए उन्हें आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। बताया गया कि खेल यात्राओं और प्रतियोगिताओं से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए उन्हें कर्ज तक लेना पड़ा।
पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने के बाद भी आर्थिक स्थिति में सुधार न होने से उनके सामने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ कर्ज चुकाने की चुनौती भी बनी रही।
सरकारी नौकरी और खेल कोटे का नहीं मिला लाभ
अमरदीप की परेशानी का एक बड़ा कारण सरकारी नौकरी का न मिलना बताया जा रहा है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद उन्हें खेल कोटे के तहत नौकरी नहीं मिल सकी।
ऐसे में खेल प्रतिभा के बावजूद उन्हें अपनी आजीविका के लिए दूसरे कामों पर निर्भर होना पड़ा। उनकी कहानी सामने आने के बाद खेल प्रतिभाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और रोजगार व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई खिलाड़ी की बेबसी
अमरदीप की आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आई, जिसके बाद उनकी कहानी तेजी से वायरल हुई। लोगों ने सरकार से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की मदद करने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
मामला सामने आने के बाद झारखंड सरकार और खेल विभाग का ध्यान भी इस ओर गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान
सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के खेल विभाग ने अमरदीप की स्थिति का संज्ञान लिया है। सरकार की ओर से उन्हें जल्द रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।
बताया गया है कि अमरदीप को राज्य की खेल नीति के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
अब रोजगार की उम्मीद
सरकार के संज्ञान लेने के बाद अमरदीप और उनके परिवार को उम्मीद है कि उनकी वर्षों की खेल उपलब्धियों को उचित सम्मान मिलेगा और उन्हें स्थायी रोजगार का अवसर मिल सकेगा। अगर उन्हें खेल नीति के तहत नौकरी मिलती है, तो इससे न सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है, बल्कि दूसरे खिलाड़ियों को भी यह भरोसा मिलेगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद उनके भविष्य की चिंता की जाएगी।
अमरदीप की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की मजबूरी नहीं, बल्कि उन तमाम खिलाड़ियों की चुनौती को भी सामने लाती है जो देश के लिए पदक जीतते हैं, लेकिन खेल के बाद रोजगार और आर्थिक सुरक्षा के लिए संघर्ष करते हैं। अब सरकार के संज्ञान के बाद नजर इस बात पर है कि आश्वासन कब वास्तविक रोजगार में बदलता है।


