दिल्ली में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी और बहू गीतिका आडवाणी को नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, तीनों के नाम पुराने मतदाता रिकॉर्ड से लिंक नहीं हो पाए, जिसके चलते उन्हें ‘No Mapping’ श्रेणी में रखा गया है।
कैलाश गहलोत और परिवार के नाम भी सूची में
दिल्ली के पूर्व मंत्री और मौजूदा भाजपा विधायक कैलाश गहलोत को भी ‘No Mapping’ के तहत नोटिस मिला है। उनकी पत्नी मौसमी मिश्रा गहलोत और बड़ी बेटी जाह्नवी गहलोत का नाम भी इसी श्रेणी में शामिल है।
मनीष सिसोदिया के परिवार को भी नोटिस
पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी नोटिस जारी किया गया है, हालांकि उपलब्ध जानकारी में उनके नोटिस की वजह स्पष्ट नहीं बताई गई है। उनकी पत्नी सीमा को self-name mismatch, जबकि बेटे मीर को parent-name mismatch के तौर पर चिह्नित किया गया है।
कई अन्य प्रमुख नाम भी शामिल
SIR से जुड़ी नोटिस सूची में पूर्व केंद्रीय मंत्री अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल, सुब्रमण्यम स्वामी, भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई अन्य प्रमुख नाम भी शामिल हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केजरीवाल को भी विसंगतियों के संबंध में नोटिस दिए गए हैं।
3.31 लाख नहीं, 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस
दिल्ली CEO कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार कुल 33,12,919 मतदाताओं को SIR के दौरान संभावित विसंगतियों के लिए नोटिस दिया गया है। इनमें 13,79,785 मतदाता ‘No Mapping’ और 19,33,134 ‘Logical Discrepancies’ श्रेणी में हैं।
नोटिस का मतलब नाम हटना नहीं
इन नोटिसों का उद्देश्य संबंधित मतदाताओं से दस्तावेज और स्पष्टीकरण लेकर रिकॉर्ड का सत्यापन करना है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रमुख लोगों सहित नोटिस पाने वाले मतदाताओं की दस्तावेजी प्रक्रिया में सहायता की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल होने का निर्णय सत्यापन की प्रक्रिया के बाद होगा।
SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला
दिल्ली की SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर हुई है। अदालत 22 सितंबर को मामले पर सुनवाई करने वाली है। याचिकाकर्ताओं ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और नोटिस जारी करने के आधार को लेकर अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
स्वामी और सिब्बल ने उठाए सवाल
सुब्रमण्यम स्वामी ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि उनका नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया जा रहा है और उन्होंने इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही। कपिल सिब्बल ने भी मतदाता नामों को हटाए जाने के मुद्दे के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की संभावना जताई है। ये संबंधित नेताओं के बयान हैं; इन दावों पर अंतिम स्थिति चुनावी सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

