उत्तराखंड में चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने वाले पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत वर्दीधारी सेवाओं के कई महत्वपूर्ण पदों को शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य सेना से लौटने वाले युवाओं को राज्य की सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
किन पदों पर मिलेगा आरक्षण का लाभ
आरक्षण के दायरे में पुलिस आरक्षी, उपनिरीक्षक, प्लाटून कमांडर, अग्निशामक, बंदी रक्षक, वन आरक्षी, वन दरोगा, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय रक्षक जैसे पद शामिल किए गए हैं। इन पदों की भर्ती में पात्र पूर्व अग्निवीरों को निर्धारित नियमों के अनुसार आरक्षण का लाभ मिलेगा।
181 पदों की रिक्तियों का ब्योरा केंद्र को भेजा
गृह सचिव शैलेश बगौली के अनुसार, विभिन्न विभागों में उपलब्ध रिक्त पदों का ब्योरा केंद्र सरकार को भेजा गया है। यह कदम उन युवाओं के लिए सरकारी रोजगार के अवसर तैयार करने की दिशा में उठाया गया है, जो अग्निवीर के तौर पर चार साल की सैन्य सेवा पूरी कर चुके हैं।
अग्निवीर रोजगार सेल बनाने की तैयारी
सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को रोजगार से जोड़ने के लिए अग्निवीर रोजगार सेल बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। अगस्त 2026 में उत्तराखंड कैबिनेट ने इसके गठन को मंजूरी दी थी। प्रस्तावित सेल मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन काम करेगा।
सरकारी नौकरी के साथ शिक्षा और स्वरोजगार पर भी फोकस
प्रस्तावित रोजगार सेल का उद्देश्य पूर्व अग्निवीरों को केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित रखना नहीं है। उन्हें रोजगार, उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की योजना है। सरकार सैन्य सेवा के दौरान मिले प्रशिक्षण और अनुभव को आगे के करियर में इस्तेमाल कराने पर भी जोर दे रही है।
सैन्य प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ने की कोशिश
अग्निवीरों को सेना में सेवा के दौरान अनुशासन, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण मिलता है। सरकार की योजना इन कौशलों को अलग-अलग रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की है, ताकि सेवा पूरी करने के बाद युवाओं के लिए करियर के विकल्प बढ़ सकें।
भर्ती नियमों में अतिरिक्त छूट पर भी विचार
पूर्व अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में अवसर देने के लिए भर्ती नियमों में कुछ अतिरिक्त राहत देने पर भी विचार किया जा रहा है। सितंबर 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद राज्य सरकार कुछ भर्तियों में अग्निवीरों को लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट देने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, इसके लिए संबंधित भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन करना होगा।
पहली खेप के लौटने से पहले तैयारियां तेज
अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाली अग्निवीरों की पहली खेप अब सेवा अवधि पूरी कर वापस लौटने लगी है। उत्तराखंड में भी पहली बड़ी खेप के लौटने से पहले रोजगार से जुड़ी तैयारियों को गति दी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मई 2026 में प्रदेश के 4,500 से अधिक युवा अग्निवीर के तौर पर सेना में सेवाएं दे रहे थे।
नौसेना-वायुसेना की खेप नवंबर-दिसंबर से, सेना की जनवरी में
जानकारी के मुताबिक, नौसेना और वायुसेना के अग्निवीरों की पहली खेप नवंबर-दिसंबर 2026 से वापस आनी शुरू हो सकती है। वहीं सेना से पहली बड़ी खेप के जनवरी 2027 में लौटने की संभावना है। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से रिक्तियों का ब्योरा भेजना और रोजगार सेल की तैयारी को सेवा पूरी करने के बाद की व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकारी नौकरी से आगे रोजगार के कई विकल्प
राज्य सरकार की योजना पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरी के साथ-साथ उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के विकल्प भी उपलब्ध कराने की है। आने वाले समय में विभागों की रिक्तियों, आरक्षण व्यवस्था और भर्ती नियमों के आधार पर पात्र पूर्व अग्निवीरों को इन अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।


