नैनीताल:कुमाऊं विश्वविद्यालय ने बीकॉम ऑनर्स पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव करते हुए इसका स्वरूप ही बदल दिया है। अब तीन वर्षीय बीकॉम ऑनर्स कोर्स करने वाले विद्यार्थियों को ऑनर्स की डिग्री नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें चुने गए विशेषज्ञता क्षेत्र में स्नातक कॉमर्स की डिग्री प्रदान की जाएगी। यह बदलाव नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप बताया जा रहा है, हालांकि बीच सत्र में लिए गए इस फैसले पर सवाल भी उठने लगे हैं।
बीच सत्र में बदला कोर्स का स्वरूप
विश्वविद्यालय प्रशासन ने चल रहे शैक्षणिक सत्र के बीच ही बीकॉम ऑनर्स पाठ्यक्रम से ‘ऑनर्स’ शब्द हटाने का निर्णय लिया है। अब यह कोर्स प्रोफेशनल स्पेशलाइजेशन आधारित होगा, जिसमें विद्यार्थियों को बैंकिंग एंड फाइनेंस, टैक्स प्लानिंग एंड मैनेजमेंट या एकाउंटिंग एंड फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में डिग्री दी जाएगी।
एनईपी-2020 का हवाला
विश्वविद्यालय के अनुसार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने पर ही ऑनर्स डिग्री देने का प्रावधान है। चूंकि बीकॉम ऑनर्स कोर्स तीन वर्ष का है, इसलिए इसे संशोधित कर विशेषज्ञता आधारित डिग्री में बदला गया है। यह बदलाव सत्र 2025 में प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर लागू होगा।
प्राध्यापकों ने उठाए सवाल
बीच सत्र में किए गए इस बदलाव पर कई प्राध्यापकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब छात्रों को ऑनर्स कोर्स में प्रवेश दिया गया था, तो अचानक नियम बदलना उचित नहीं है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि यह निर्णय अकादमिक समिति से अनुमोदित है और कॉलेजों को इसके संबंध में पत्र भी जारी कर दिया गया है।
कहां-कहां संचालित है कोर्स
कुमाऊं विश्वविद्यालय के तहत 11 कॉलेजों में बीकॉम ऑनर्स पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है, जिसमें करीब 1500 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। महिला महाविद्यालय राज्य का एकमात्र सरकारी कॉलेज है, जहां यह कोर्स चल रहा है। इसके अलावा डीएसबी परिसर और नौ निजी संस्थानों में भी यह पाठ्यक्रम संचालित है।
पहले सेमेस्टर में ही चुननी होगी स्पेशलाइजेशन
नए सिस्टम के तहत विद्यार्थियों को पहले ही सेमेस्टर में अपना विशेषज्ञता क्षेत्र चुनना होगा। उसी के अनुसार पूरे कोर्स की पढ़ाई कराई जाएगी, जो इसे सामान्य बीकॉम से अलग बनाता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव छात्रों को बेहतर करियर विकल्प देने और उन्हें रोजगारोन्मुख बनाने के उद्देश्य से किया गया है, लेकिन अचानक हुए इस फैसले से छात्रों और शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।


