JEE Main का रिजल्ट आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कितने नंबर पर कितनी पर्सेंटाइल बनेगी. लेकिन यहां समझना जरूरी है कि मार्क्स और पर्सेंटाइल एक ही चीज नहीं हैं.
मार्क्स आपके सही जवाबों के आधार पर मिलते हैं, जबकि पर्सेंटाइल यह बताती है कि आपने बाकी छात्रों के मुकाबले कैसा प्रदर्शन किया.
कैसे तय होती है पर्सेंटाइल?
पर्सेंटाइल सीधे आपके नंबरों पर नहीं, बल्कि आपकी रैंकिंग पर निर्भर करती है. अगर आपकी शिफ्ट कठिन थी और आपने कम नंबर भी हासिल किए, तब भी आपकी पर्सेंटाइल ज्यादा हो सकती है.
उदाहरण के तौर पर, अगर 100 में से 90 छात्र आपसे कम या बराबर अंक लाते हैं, तो आपकी पर्सेंटाइल 90 होगी.
पर्सेंटाइल का फॉर्मूला
- National Testing Agency द्वारा अपनाया गया फॉर्मूला इस तरह काम करता है:
- Percentile = (आपसे कम या बराबर स्कोर करने वाले कैंडिडेट्स / कुल कैंडिडेट्स) × 100
- यानी यह पूरी तरह रिलेटिव स्कोरिंग सिस्टम है.
संभावित Marks vs Percentile (अनुमान)
पिछले वर्षों के ट्रेंड के आधार पर संभावित आंकड़े इस प्रकार हो सकते हैं:
- 285 – 300 अंक. 99.99+ पर्सेंटाइल
- 260 – 280 अंक. 99.5 – 99.8
- 210 – 250 अंक. 99.0 – 99.4
- 180 – 200 अंक. 98.0 – 98.9
- 150 – 175 अंक. 97.0 – 97.9
- 120 – 145 अंक. 95.0 – 96.9
- 100 – 115 अंक. 90.0 – 94.9
(नोट: ये सिर्फ अनुमानित डेटा है, वास्तविक परिणाम अलग हो सकते हैं)
कितनी पर्सेंटाइल पर मिलेगा NIT या IIIT
National Institutes of Technology में कोर ब्रांच (CS, IT, ECE) के लिए आमतौर पर 98+ पर्सेंटाइल की जरूरत होती है. हालांकि 95 से 97 पर्सेंटाइल वाले छात्रों को भी नए NITs या Indian Institutes of Information Technology में एडमिशन मिल सकता है.
नॉर्मलाइजेशन क्यों जरूरी है?
JEE Main अलग-अलग शिफ्ट में होता है और हर शिफ्ट का पेपर अलग कठिनाई का होता है. ऐसे में National Testing Agency नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाता है, जिससे सभी छात्रों को बराबरी का मौका मिले.
क्यों बदलता है Marks vs Percentile
अगर किसी शिफ्ट का पेपर आसान होता है, तो ज्यादा छात्र हाई स्कोर करते हैं और पर्सेंटाइल पाने के लिए ज्यादा नंबर चाहिए होते हैं.
वहीं अगर पेपर कठिन हो, तो कम नंबर पर भी बेहतर पर्सेंटाइल मिल सकती है. इसी कारण हर साल Marks vs Percentile का पैटर्न बदलता रहता है.
छात्रों के लिए जरूरी सलाह
रिजल्ट आने से पहले मार्क्स और पर्सेंटाइल के इस अंतर को समझना बेहद जरूरी है. इससे कन्फ्यूजन कम होगा और आप अपने स्कोर का सही आकलन कर पाएंगे.


