उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और प्रकृति प्रेम का प्रतीक लोकपर्व फूलदेई पूरे जनपद में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया. इस अवसर पर जिलाधिकारी आवास भी बच्चों की किलकारियों, लोकगीतों और रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू से महक उठा.
डीएम आवास पहुंचीं बच्चों की टोलियां
फूलदेई पर्व के मौके पर बच्चों का एक समूह उत्साह के साथ जिलाधिकारी आवास पहुंचा. बच्चों ने परंपरा के अनुसार घर की देहली पर रंग-बिरंगे फूल बिखेरते हुए सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की.
बच्चों की मधुर आवाज में गूंजते लोकगीत और देहली पर सजे फूलों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया. वहां मौजूद लोगों ने भी इस पारंपरिक पर्व का आनंद लिया.

डीएम ने किया बच्चों का स्वागत
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बच्चों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें स्नेहपूर्वक उपहार भी दिए. इस दौरान उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई, सपनों और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी जाना.
उन्होंने बच्चों को मेहनत और लगन से पढ़ाई करने की प्रेरणा दी और कहा कि शिक्षा के साथ अपनी लोकसंस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना भी जरूरी है.
गांव-गांव में दिखा फूलदेई का उत्साह
फूलदेई पर्व की रौनक जनपद के गांवों और कस्बों में भी देखने को मिली. छोटे-छोटे बच्चों की टोलियां घर-घर जाकर देहली पर फूल डालते हुए लोकगीत गा रही थीं और परिवारों के लिए सुख-समृद्धि की कामना कर रही थीं.
लोगों ने भी बच्चों को आशीर्वाद देते हुए मिठाइयां और उपहार दिए, जिससे पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बना रहा.
संस्कृति से जुड़ने का संदेश
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि फूलदेई उत्तराखंड की लोकसंस्कृति की बेहद सुंदर परंपरा है, जो प्रकृति के प्रति आभार, सामाजिक सद्भाव और खुशहाली का संदेश देती है.
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़कर आगे बढ़ना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन परंपराओं को जीवित रख सकें.


