चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले स्वास्थ्य विभाग ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है. इसके तहत 25 विशेषज्ञ डॉक्टर, 178 मेडिकल अधिकारी और 414 पैरामेडिकल स्टाफ तैनात किए गए हैं.
बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को ठंड और ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है.
पहली बार केदारनाथ-बदरीनाथ में अस्पताल सुविधा
इस बार केदारनाथ में 17 बेड और बदरीनाथ धाम में 45 बेड का अस्पताल संचालित किया जाएगा. इसके अलावा रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में 47 स्थायी स्वास्थ्य केंद्रों को और बेहतर किया गया है, जबकि 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट पूरी तरह सक्रिय कर दी गई हैं.
देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में 57 स्क्रीनिंग कियोस्क लगाए गए हैं. यहां यात्रियों की जांच कर हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान की जाएगी.
हर मोर्चे पर तैनात विशेषज्ञ टीम
स्वास्थ्य विभाग ने हर स्तर पर प्रशिक्षित टीम तैनात की है. विशेषज्ञ डॉक्टरों में फिजिशियन, ऑर्थोपेडिशियन, एनेस्थेटिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट शामिल हैं. यात्रा मार्ग पर 177 एंबुलेंस भी तैनात की जा रही हैं. गंभीर स्थिति में हेलिकॉप्टर के जरिए मरीजों को बड़े अस्पतालों तक पहुंचाया जाएगा.
श्रद्धालुओं की मदद के लिए 112, 108 और 104 हेल्पलाइन नंबर चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे. 104 हेल्पलाइन के जरिए हाई रिस्क यात्रियों की निगरानी भी की जाएगी.
सरकार पूरी तरह तैयार
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि चारधाम यात्रा केवल आस्था नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सुरक्षा का विषय है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस बार स्वास्थ्य सेवाओं को नए स्तर पर ले जाया गया है, ताकि किसी भी श्रद्धालु को इलाज के अभाव में परेशानी न हो.


