रुद्रप्रयाग जिले में ही इस सीजन में 20 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे करीब 15 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है. लेकिन यह समस्या सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है.
गढ़वाल और कुमाऊं के कई इलाकों से लगातार आग की खबरें आ रही हैं. हाल ही में Valley of Flowers National Park जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी कई दिनों तक आग लगी रही, जिसे बुझाने के लिए भारतीय वायु सेना की मदद लेनी पड़ी.
उत्तराखंड में 45 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है और हर साल नवंबर से मई के बीच आग की घटनाएं होती हैं, लेकिन अब इनकी आवृत्ति और तीव्रता दोनों तेजी से बढ़ रही हैं.
क्यों बढ़ रही हैं आग की घटनाएं
विशेषज्ञों और वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इसके पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं:
1. सूखा मौसम और बढ़ती गर्मी
2026 में सर्दी जल्दी खत्म हो गई और तापमान तेजी से बढ़ा, जिससे जंगलों में नमी की कमी हो गई. सूखी पत्तियां और टहनियां आग पकड़ने के लिए बेहद संवेदनशील हो गई हैं.
2. चीड़ के जंगल सबसे बड़ा जोखिम
उत्तराखंड के बड़े हिस्से में चीड़ (Pine) के पेड़ पाए जाते हैं. इनकी सूखी सुइयां जमीन पर जमा होकर आग को तेजी से फैलाती हैं. हर साल लाखों टन पाइन नीडल्स जंगलों में गिरती हैं, जो आग के लिए ईंधन का काम करती हैं.
3. मानव लापरवाही और जानबूझकर आगजनी
वन अधिकारियों के मुताबिक कई मामलों में लोग जानबूझकर आग लगाते हैं. कुछ लोग घास उगाने या जंगल उत्पाद (जैसे खाद्य फंगस) पाने के लिए पत्तियों में आग लगा देते हैं, जो बाद में बड़े स्तर की आग बन जाती है.
4. जलवायु परिवर्तन का असर
बढ़ता तापमान और बदलते मौसम पैटर्न भी आग की घटनाओं को बढ़ा रहे हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार गर्म और शुष्क वातावरण जंगलों को ज्यादा ज्वलनशील बना रहा है.
पहाड़ों में भी बढ़ रहा तापमान
India Meteorological Department के अनुसार पहाड़ी राज्यों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है.
मसूरी और नैनीताल जैसे हिल स्टेशनों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है, जो सामान्य से काफी अधिक है.
पहले जहां पहाड़ ठंडे और नम रहते थे, अब वहां भी गर्म और सूखा मौसम देखने को मिल रहा है, जिससे आग की घटनाएं और तेजी से फैल रही हैं.
कानूनी कार्रवाई और चुनौतियां
वन विभाग ने आग लगाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. दोषियों पर जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है.
लेकिन चुनौती यह है कि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आग पर काबू पाना बेहद मुश्किल होता है. कई बार आग इतनी तेजी से फैलती है कि उसे रोकना मुश्किल हो जाता है.
उत्तराखंड में जंगलों की आग अब केवल मौसमी समस्या नहीं रह गई है. यह एक जटिल संकट बन चुका है, जिसमें मौसम, पर्यावरण और मानव व्यवहार तीनों की बड़ी भूमिका है. अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है.


