नरेंद्र मोदी शुक्रवार को देश के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की जाएगी. हालांकि जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां के मुख्यमंत्रियों के इस बैठक में शामिल होने की संभावना कम बताई जा रही है.
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और “टीम इंडिया” की भावना के तहत एक संयुक्त रणनीति तैयार करना है. सरकार चाहती है कि इस वैश्विक संकट के असर से निपटने के लिए सभी राज्य मिलकर काम करें.
पीएम ने crisis को लेकर क्या कहा
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पहले ही सतर्क और संतुलित रुख अपना चुके हैं. संसद में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा था कि यह युद्ध एक बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट का कारण बन सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ेगा.
प्रधानमंत्री ने लोगों से संभावित दिक्कतों के लिए तैयार रहने की अपील भी की, साथ ही यह भरोसा दिलाया कि सरकार इस संकट के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार काम कर रही है.
भारत की रणनीति
भारत की रणनीति दो प्रमुख आधारों पर टिकी है—तैयारी और कूटनीति. सरकार ने कोविड काल की तरह सात सशक्त समूह (Empowered Groups) बनाए हैं, जो ईंधन, सप्लाई चेन, उर्वरक और महंगाई जैसे अहम क्षेत्रों की निगरानी करेंगे. इन समूहों का उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है.
इसके साथ ही भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में भी काम कर रहा है. सरकार नए देशों से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो और सप्लाई बाधित न हो.
भारत ने तनाव करने की बात की
कूटनीतिक स्तर पर भारत ने हमेशा तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा है कि इस संकट का हल शांति और संवाद से ही संभव है.
घरेलू स्तर पर उन्होंने राज्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखना और कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. खासकर किसानों और गरीब व प्रवासी मजदूरों को इस संकट के असर से बचाने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
कुल मिलाकर, यह बैठक देश के सामने खड़े संभावित आर्थिक और सामाजिक प्रभावों से निपटने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.


