उत्तराखंड में भूकंप के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने भवन निर्माण नियमों को अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. राज्य के पूरे क्षेत्र को उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता वाले जोन में शामिल किए जाने के बाद यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है.
जोन-6 में आने के बाद बदले जाएंगे बायलाज
नए भूकंपीय वर्गीकरण के अनुसार अब पूरा उत्तराखंड जोन-6 में रखा गया है. इससे पहले राज्य का पर्वतीय क्षेत्र जोन-5 और मैदानी इलाका जोन-4 में आता था. इस बदलाव के बाद मौजूदा भवन निर्माण उपविधि को अपडेट करने की जरूरत महसूस की गई है.
14 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भवन निर्माण उपविधि की समीक्षा के लिए 14 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की है. समिति की अध्यक्षता केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार करेंगे.
तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल
समिति में आईआईटी रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, यूएनडीपी और अन्य तकनीकी संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है. इसके अलावा भूकंप, भू-तकनीक, भूस्खलन और संरचनात्मक सुरक्षा के विशेषज्ञ भी समिति का हिस्सा हैं.
आधुनिक तकनीक और पारंपरिक निर्माण पर फोकस
समिति मौजूदा भवन निर्माण बायलाज की विस्तृत समीक्षा करेगी. इसमें भूकंपरोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, विंड लोड, संरचनात्मक मजबूती और आधुनिक निर्माण तकनीकों को शामिल किया जाएगा. साथ ही पारंपरिक पहाड़ी निर्माण प्रणाली को भी वैज्ञानिक आधार पर नियमों में जोड़ा जाएगा.
सुरक्षित निर्माण संस्कृति विकसित करना लक्ष्य
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नियमों में बदलाव करना नहीं, बल्कि राज्य में सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है. संशोधित उपविधि में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.
आवास विभाग करेगा संशोधन
सभी पहलुओं पर विचार के बाद समिति अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आवास विभाग को सौंपेगी. रिपोर्ट के आधार पर आवास विभाग भवन निर्माण उपविधि में संशोधन कर उसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा.
समिति की मुख्य जिम्मेदारियां
समिति मौजूदा बायलाज का विश्लेषण करेगी और भूकंप, भूस्खलन व अन्य आपदा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए संशोधित प्रारूप तैयार करेगी. नई तकनीकों, संरचनात्मक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल निर्माण से जुड़े प्रावधान भी इसमें शामिल होंगे. साथ ही अभियंताओं और योजनाकारों के प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण के सुझाव भी दिए जाएंगे.
आपदा जोखिम में होगी कमी
सरकार का मानना है कि संशोधित भवन निर्माण नियमों से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा. इससे भविष्य में भूकंप और अन्य आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.


