उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर गन्ना मूल्य बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है. किसान संगठन लगातार गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में जुटे हैं. नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन अभी राज्य परामर्शी समिति की बैठक नहीं हुई है. माना जा रहा है कि जल्द ही समिति की बैठक में गन्ना मूल्य को लेकर फैसला हो सकता है.
चुनावी साल में पहले भी बढ़ता रहा है गन्ना मूल्य
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान चुनाव से पहले गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी देखने को मिली है. 2017 में बीजेपी सरकार बनने के बाद 2017-19 के दौरान गन्ना मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी.
इसके बाद 2021-22 में विधानसभा चुनाव से पहले गन्ने के दाम 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाए गए. वहीं, 2023-24 में लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने गन्ना मूल्य में 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी.
हालांकि, 2025-26 में भी सरकार ने पेराई सत्र से पहले गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी. अब 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में किसान संगठनों की नजर एक बार फिर गन्ने के दाम पर है.
किसान संगठन बना रहे सरकार पर दबाव
किसान संगठन गन्ने की लागत और चीनी के बढ़ते दाम का हवाला देते हुए गन्ना मूल्य में पर्याप्त बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को गन्ने का उचित मूल्य तय करना चाहिए.
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि चीनी के दाम में भी काफी बढ़ोतरी हुई है. वहीं, महाराष्ट्र में उत्पादन कम होने के कारण चीनी के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है. ऐसे में सरकार को गन्ना मूल्य में उचित बढ़ोतरी करनी चाहिए.
जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन की तैयारी
किसान संगठन अब अपनी मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी में भी जुट गए हैं. धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि इसी महीने गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा.
वहीं, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश प्रवक्ता आलोक वर्मा ने बताया कि किसान 23 अक्टूबर को गन्ना संस्थान में जुटेंगे और अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन करेंगे.
ऐसे में अब सबकी नजर राज्य परामर्शी समिति की बैठक पर है. बैठक में सरकार गन्ना मूल्य को लेकर क्या फैसला करती है, इस पर किसानों और चीनी उद्योग की नजर बनी हुई है.


