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उत्तराखंड चुनाव 2027: ‘नारी शक्ति’ बनेगी गेमचेंजर, महिला टिकट बढ़ाने की तैयारी में भाजपा-कांग्रेस

Mintwire by Mintwire
27/04/2026
in उत्तराखंड, देश, राज्य
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उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल धीरे-धीरे गरमाने लगा है और इस बार ‘नारी शक्ति’ चुनावी समीकरणों का अहम हिस्सा बनती दिख रही है। महिला आरक्षण को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस का असर अब प्रदेश की राजनीति में भी साफ नजर आ रहा है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दल महिलाओं को ज्यादा टिकट देने के दबाव में हैं और इसके लिए अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।

प्रदेश की राजनीति में अब तक महिलाओं का प्रतिनिधित्व सीमित रहा है, जिसकी एक बड़ी वजह उन्हें कम टिकट मिलना रही है। लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे के चलते इस बार तस्वीर अलग हो सकती है। भले ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने में अभी समय है, लेकिन इसकी गूंज उत्तराखंड के चुनावी मैदान में पहले से सुनाई देने लगी है।

भाजपा ने शुरू की सीटों की पहचान

भारतीय जनता पार्टी ने उन सीटों की पहचान शुरू कर दी है, जहां महिला उम्मीदवार मजबूत स्थिति में हो सकती हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस बार महिलाओं की भागीदारी पहले से ज्यादा होगी। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सात महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जो कुल सीटों का लगभग 10 प्रतिशत था। अब पार्टी इस आंकड़े को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

कांग्रेस भी बढ़ाएगी महिला भागीदारी

वहीं कांग्रेस भी इस मुद्दे पर पीछे नहीं रहना चाहती। पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि 2027 के चुनाव में महिलाओं को अधिक संख्या में टिकट दिए जाएंगे। कांग्रेस नेतृत्व 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को 2027 से ही लागू करने की पैरवी कर रहा है। 2022 के चुनाव में कांग्रेस ने पांच महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिनमें से दो ही जीत हासिल कर सकीं।

विधानसभा में अभी सीमित प्रतिनिधित्व

वर्तमान उत्तराखंड विधानसभा में महिलाओं की संख्या केवल नौ है, जो कुल 70 सीटों का लगभग 13 प्रतिशत है। यदि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए तो करीब 23 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करनी होंगी। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों को अपने टिकट वितरण में बड़ा बदलाव करना पड़ेगा।

कांग्रेस संगठन में अंदरूनी खींचतान

हालांकि कांग्रेस के सामने संगठनात्मक चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पार्टी में ब्लॉक और नगर अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, करीब 35 ब्लॉकों में अध्यक्ष पद की घोषणा अब तक लंबित है, जहां एक-एक पद के लिए कई दावेदार सामने आ रहे हैं। इस आंतरिक खींचतान का असर चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

महिलाएं बन सकती हैं निर्णायक शक्ति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार महिला मतदाता और महिला उम्मीदवार दोनों ही चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में जो दल महिलाओं को बेहतर प्रतिनिधित्व और ठोस मुद्दे देगा, उसे चुनावी फायदा मिल सकता है।

Tags: UttarakhandUttarakhand electionsUttarakhand news
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