उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली संकट भी गहराता जा रहा है। शुक्रवार को प्रदेश में बिजली की मांग इस महीने के रिकॉर्ड स्तर को पार करते हुए 5 करोड़ यूनिट से ऊपर पहुंच गई। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर के चलते बिजली विभाग को मजबूरन कई इलाकों में कटौती करनी पड़ रही है।
आंकड़ों के अनुसार, राज्य में उपलब्ध बिजली मांग के मुकाबले काफी कम है। राज्य पूल से करीब 1.1 करोड़ यूनिट और केंद्रीय पूल से लगभग 1.5 करोड़ यूनिट बिजली मिल रही है। इस तरह कुल मिलाकर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के पास करीब 2.7 करोड़ यूनिट बिजली ही उपलब्ध हो पा रही है, जो जरूरत से काफी कम है।
बाजार से खरीद के बाद भी बनी कमी
बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए यूपीसीएल को खुले बाजार से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। बाजार से करीब 1.5 करोड़ यूनिट और अन्य स्रोतों से 34 लाख यूनिट बिजली लेने के बावजूद कुल आपूर्ति 4.6 करोड़ यूनिट तक ही पहुंच सकी।
इसके बावजूद करीब 30 लाख यूनिट से अधिक बिजली की कमी बनी रही, जिसके कारण प्रदेशभर में बिजली कटौती करनी पड़ी। विभाग के अनुसार, यह कटौती फिलहाल अस्थायी है, लेकिन मांग बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में ज्यादा असर
बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और छोटे कस्बों में देखने को मिल रहा है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब ढाई घंटे तक बिजली कटौती की गई।
इसके अलावा लंढौरा, मंगलौर, लक्सर, बहादराबाद, सेलाकुई, सहसपुर, विकासनगर, डोईवाला और कोटद्वार जैसे कस्बों में दो से ढाई घंटे तक बिजली गुल रही। बड़े शहरों में भी स्थिति सामान्य नहीं रही—काशीपुर में एक घंटे, रुड़की और हल्द्वानी में करीब डेढ़ घंटे तक कटौती की गई।
उद्योगों पर भी पड़ा असर
बिजली की कमी का असर औद्योगिक क्षेत्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। खासकर स्टील उद्योगों में करीब 12 घंटे तक बिजली कटौती करनी पड़ी, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है। उद्योग जगत ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और जल्द समाधान की मांग की है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है समस्या
बिजली विभाग के मुताबिक, अगर गर्मी इसी तरह बढ़ती रही तो अगले सप्ताह तक बिजली की मांग 5.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। ऐसे में आपूर्ति और मांग के बीच का अंतर और बढ़ने की आशंका है।
बाजार में बिजली पहले से ही महंगी दरों पर मिल रही है और पीक आवर में इसकी उपलब्धता भी सीमित है। ऐसे में यूपीसीएल के सामने बिजली की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
गर्मी के साथ बढ़ेगी चुनौती
प्रदेश में तापमान बढ़ने के साथ ही एसी, कूलर और अन्य उपकरणों के उपयोग में तेजी आई है, जिससे बिजली की खपत भी लगातार बढ़ रही है। यदि जल्द ही कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और गहरा सकता है।


