उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। जहां एक तरफ मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी लोगों को परेशान कर रही है, वहीं अब पहाड़ों के साथ-साथ कुछ मैदानी हिस्सों में भी राहत के संकेत मिलने लगे हैं। मौसम विभाग ने अगले 6 दिनों तक राज्य में तेज हवाओं, बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है।
आज से उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चमोली जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी भी देखने को मिल सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और मौसम सुहावना हो जाएगा।
देहरादून में भी बदलेगा मिजाज
राजधानी देहरादून में भी मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। यहां आंशिक बादल छाए रहने, गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। अधिकतम तापमान 39°C और न्यूनतम 22°C के आसपास रह सकता है।
हाल ही में दून में तापमान सामान्य से 5 डिग्री अधिक 38.7°C तक पहुंच गया था, जबकि हरिद्वार में पारा 41°C और पंतनगर में 40.4°C रिकॉर्ड किया गया, जो गर्मी की तीव्रता को दर्शाता है।
28 अप्रैल से तेज होगा असर
मौसम विभाग के अनुसार 28 अप्रैल से राज्य में मौसम का प्रभाव और तेज हो जाएगा। कुमाऊं क्षेत्र के जिलों—नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कई स्थानों पर बारिश, ओलावृष्टि और 40–50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
अन्य पहाड़ी जिलों में भी बारिश का दायरा बढ़ेगा, जबकि मैदानी इलाकों में भी कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।
29–30 अप्रैल को ज्यादा सतर्कता जरूरी
29 और 30 अप्रैल को गढ़वाल और कुमाऊं के अधिकांश जिलों में मौसम का असर ज्यादा रहेगा। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कई जगहों पर तेज बारिश, आंधी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है।
इस दौरान कुछ इलाकों में अति-तेज बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
1 मई तक जारी रहेगा असर
मौसम विभाग का अनुमान है कि 1 मई तक पहाड़ी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं मैदानी इलाकों में भी कहीं-कहीं हल्की बारिश से गर्मी से राहत मिल सकती है।
जारी हुई चेतावनी
मौसम विभाग ने 28 से 30 अप्रैल के बीच लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज हवाओं से पेड़ों और कच्चे मकानों को नुकसान हो सकता है, जबकि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है
यात्रियों और स्थानीय लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।


