उत्तराखंड के हरिद्वार में ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने शनिवार को विशेष अभियान चलाकर धार्मिक स्थलों से 94 लाउडस्पीकर हटा दिए. अधिकारियों के अनुसार, ये लाउडस्पीकर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित किए जा रहे थे. कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, सरकारी आदेशों और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमों के तहत की गई.
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हुई कार्रवाई
पुलिस ने जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विभिन्न थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया. अभियान के दौरान शहर के इलाकों से 31 और ग्रामीण क्षेत्रों से 63 लाउडस्पीकर हटाए गए. अधिकारियों का कहना है कि इन सभी मामलों में निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था.
सभी के लिए समान रूप से लागू होंगे नियम
पुलिस ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय या धार्मिक स्थल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना है. इसलिए जिन स्थानों पर लाउडस्पीकर तय मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, वहां कार्रवाई की गई.
बिना अनुमति लाउडस्पीकर पर होगी कार्रवाई
अभियान के दौरान धार्मिक स्थलों के संचालकों और प्रबंधन समितियों को नियमों की जानकारी भी दी गई. उन्हें बताया गया कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लिए बिना लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकता. साथ ही, अनुमति मिलने के बाद भी ध्वनि का स्तर सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर रखना अनिवार्य है.
पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कोई धार्मिक स्थल या अन्य संस्थान बिना अनुमति लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करता है या तय ध्वनि सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अभियान जारी
पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर राज्यों को दिशा-निर्देश जारी करता रहा है. इसी के तहत उत्तराखंड पुलिस विभिन्न जिलों में समय-समय पर निरीक्षण और विशेष अभियान चलाकर नियमों का पालन सुनिश्चित कर रही है. हरिद्वार में शनिवार को चलाया गया यह अभियान भी इसी कड़ी का हिस्सा है.


