राज्य में 1 अप्रैल, 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को विकास भवन सभागार में ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. प्रशिक्षण में ग्राम पंचायतों की भूमिका, वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे के पृथक्करण, संग्रहण और निस्तारण की प्रक्रिया सहित नए नियमों के व्यवहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी गई.
स्वच्छ गांवों के लिए जनभागीदारी जरूरी
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांवों के निर्माण के लिए ग्राम स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करना बेहद आवश्यक है. उन्होंने ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को घरों से ही कचरे का पृथक्करण करने के लिए प्रेरित किया जाए. उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के बिना स्वच्छता अभियान को स्थायी सफलता नहीं मिल सकती.
चार रंगों के डिब्बों में होगा कचरे का संग्रह
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक गांव के निकट चार रंगों के कूड़ेदान स्थापित किए जाएंगे, जिनमें निर्धारित श्रेणी के अनुसार कचरा एकत्र किया जाएगा. इसके बाद वाहनों के माध्यम से कचरे को संग्रहण एवं प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा. उन्होंने कहा कि गांवों के छोटे बाजारों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाएगी और दुकानदारों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जागरूक किया जाएगा. साथ ही ग्राम पंचायतों को स्थानीय स्तर पर कम्पोस्टिंग, पुनर्चक्रण और स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए.
चार श्रेणियों में होगा कचरे का पृथक्करण
प्रशिक्षण के दौरान एडीपीआरओ प्रदीप सुंदरियाल ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का उद्देश्य वैज्ञानिक, व्यवस्थित और तकनीक आधारित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है. उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत घरों, दुकानों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है.
उन्होंने बताया कि हरे डिब्बे में गीला अथवा जैविक कचरा, नीले डिब्बे में सूखा एवं पुनर्चक्रण योग्य कचरा, लाल डिब्बे में सैनिटरी एवं घरेलू हानिकारक कचरा तथा काले डिब्बे में विशेष श्रेणी के अपशिष्ट का संग्रह किया जाएगा. नियमों की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग द्वारा एक मोबाइल एप भी विकसित किया जा रहा है.
ग्राम पंचायतों की भूमिका पर दिया गया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण, बल्क वेस्ट जनरेटर की जिम्मेदारियों तथा ग्राम पंचायतों की भूमिका के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई. साथ ही होटल, बड़े आवासीय परिसरों, शिक्षण संस्थानों और अन्य बड़े अपशिष्ट उत्पादकों के लिए अपने स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने के प्रावधानों से भी अवगत कराया गया.
कार्यक्रम में रहे मौजूद
इस अवसर पर पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित दुबड़िया, एडीओ पंचायत दिनेश रावत, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रचना शाह, प्रीति, योगेंद्र राणा, विपुल, आशीष नेगी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे.
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