नेपाल-चीन सीमा पर पिछले सप्ताह आई भीषण अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक 1,220 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 4,762 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 844 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाल की National Disaster Risk Reduction and Management Authority के मुताबिक, नेपाल में अब तक 1,204 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 301 लोग घायल हुए हैं। वहीं, लगभग 11,993 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। राहत और बचाव अभियान में सेना और पुलिस समेत 21,314 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
करीब 16 लाख लोग प्रभावित
इस प्राकृतिक आपदा से नेपाल में अनुमानित 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में सड़कें, पुल और बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। देश के कई हाइड्रोपावर स्टेशनों पर तैनात करीब 900 कर्मचारी भी लापता बताए जा रहे हैं।
चीन में भी भारी नुकसान
चीन की तरफ भी कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 546 लोग लापता हैं। इनमें 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं। तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट तक जाने वाली सड़क को कई दिनों की लगातार मरम्मत के बाद फिर से खोल दिया गया है। इसके बाद राहत सामग्री और बचाव उपकरण प्रभावित इलाके तक पहुंचाए जा रहे हैं।
भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की मदद
लापता लोगों की तलाश के लिए दक्षिण कोरिया की 44 सदस्यीय आपदा राहत टीम नेपाल पहुंची है। कम से कम 9 दक्षिण कोरियाई नागरिक भी लापता हैं। चीन ने ड्रोन, DNA जांच उपकरण, पानी साफ करने वाली मशीनें और अन्य राहत सामग्री भेजी है। वहीं, भारत ने भी DNA विश्लेषण विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है।
ग्लेशियर टूटने से आई थी तबाही
यह आपदा 26 अगस्त को शुरू हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के माउंट लांगटांग लिरुंग में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर टूटने से बर्फ और चट्टानों का बड़ा मलबा नीचे आया। इसके बाद भारी मलबे के साथ पानी का तेज बहाव बाढ़ में बदल गया और सीमा से लगे कई इलाकों में तबाही मचा दी।
नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, काभ्रे और काठमांडू घाटी के कई हिस्से बुरी तरह प्रभावित हुए, जबकि चीन की ओर ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग भी मलबे में दब गई।


