इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 25 वर्षीय आकृति चौधरी की NSA (National Security Act) के तहत हुई हिरासत को रद्द कर दिया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास की पढ़ाई कर चुकीं आकृति को नोएडा में अप्रैल में हुए मजदूर प्रदर्शन के दौरान भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
हाई कोर्ट की जस्टिस अतुल श्रीधरन और अचल सचदेव की पीठ ने आकृति की हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उनकी हिरासत जिस कहानी पर आधारित थी, वह राज्य की ओर से ‘मनगढ़ंत’ थी। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी नहीं है तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही राज्य सरकार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।
गिरफ्तारी और नोटिस पर उठे सवाल
अप्रैल की शुरुआत में नोएडा में करीब 40 हजार फैक्ट्री कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान कई जगह हिंसा हुई और वाहनों व संपत्तियों में आगजनी तथा पथराव की घटनाएं सामने आई थीं।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि आकृति को 12 अप्रैल सुबह 10:56 बजे गिरफ्तार किया गया था और उन पर भीड़ को पथराव व आगजनी के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया।
हालांकि, अदालत ने पाया कि BNSS की धारा 126 के तहत उचित नोटिस आकृति को नहीं दिया गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि जनरल डायरी की एंट्री से ऐसा प्रतीत होता है कि नोटिस तैयार होने से पहले ही उनकी गिरफ्तारी हो चुकी थी।
5 महीने से जेल में थीं आकृति
अदालत ने राज्य से ऐसा वीडियो पेश करने को कहा था, जिसमें आकृति को प्रदर्शनकारियों को पथराव या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाते हुए दिखाया गया हो। राज्य ने वीडियो पेश करने के लिए और समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने इसे मंजूर नहीं किया।
पीठ ने कहा कि आकृति पहले ही करीब पांच महीने जेल में रह चुकी हैं। इससे पहले भी अदालत ने राज्य से पूछा था कि रिकॉर्ड में कहां दर्ज है कि आकृति ने लोगों को बुलाकर पथराव और आगजनी करने के लिए कहा था।


