कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने एक परिवार की खुशियां पलभर में मातम में बदल दीं। हादसे में एक ही परिवार के चार बच्चों की मौत हो गई। मंगलवार शाम पोस्टमार्टम के बाद जब चारों बच्चों के शव गांव पहुंचे तो पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। बच्चों के शव देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
पिता ने कहा- मेरा सब कुछ चला गया
चारों बच्चों की मौत से टूटे पिता गया प्रसाद साहू खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। बारिश के बीच शव घर पहुंचने पर वह बदहवास होकर रोने लगे। उन्होंने कहा, ‘मेरा सब कुछ चला गया, अब जीकर ही क्या करूंगा?’ परिवार की ओर से मुआवजे को लेकर भी लगातार मांग की जा रही थी।
मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर उतरा परिवार
बच्चों के शव घर पहुंचने के बाद गया प्रसाद ग्रामीणों के साथ सड़क पर उतर आए। परिवार और ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर हंगामा करते हुए सड़क जाम कर दी। मामला बढ़ता देख सिराथू के DSP सत्येंद्र तिवारी मौके पर पहुंचे और दुखी पिता को समझाने का प्रयास किया।
DSP ने गले लगाकर दिया भरोसा
इस दौरान सामने आए भावुक वीडियो में DSP सत्येंद्र तिवारी गया प्रसाद को गले लगाकर ढांढस बंधाते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने पिता के गालों पर हाथ रखकर कहा, ‘हम आपके साथ हैं।’ इसके बाद DSP ने उनसे बच्चों का अंतिम संस्कार करने की अपील की और भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है।
समझाने के बाद हुआ अंतिम संस्कार
DSP की समझाइश के बाद परिवार और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। देर शाम बारिश के बीच चारों बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूरे गांव में मातम पसरा रहा और एक साथ चार मासूमों को खोने से हर कोई गमगीन नजर आया।
परिवार को मिले 32 लाख रुपये
बुधवार को परिवार को सहायता राशि का चेक भी सौंपा गया। प्रभारी मंत्री कृष्णा पासवान ने गया प्रसाद के परिवार को कुल 32 लाख रुपये की सहायता राशि दी। इसमें दैवीय आपदा के तहत 4 लाख रुपये, प्रधानमंत्री सहायता कोष से 2 लाख रुपये और मुख्यमंत्री सहायता कोष से 2 लाख रुपये की मदद शामिल है। चार बच्चों की मौत के बाद परिवार की ओर से मुआवजे को लेकर लगातार मांग उठाई जा रही थी।
एक परिवार के चार बच्चों की मौत
हादसे में पिपरी थाना क्षेत्र के मीरपुर निवासी गया प्रसाद के चार बच्चों की जान गई। मृतकों की पहचान 10 वर्षीय आदित्य, 2 वर्षीय रवि, 2 वर्षीय अमित और 15 वर्षीय जाह्नवी के रूप में हुई है। एक ही परिवार के चार बच्चों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।
मुआवजा आर्थिक मदद दे सकता है, दर्द नहीं
परिवार को 32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें कुछ राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन चार बच्चों को एक साथ खोने का दर्द किसी मुआवजे से कम नहीं हो सकता। इस हादसे ने परिवार की जिंदगी में ऐसी कमी छोड़ दी है, जिसे भर पाना बेहद मुश्किल है


