उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भदोही जिले का नाम बदलने का ऐलान किया। अब जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भदोही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की।
1,340 करोड़ की 112 परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास
मुख्यमंत्री ने इस दौरान जिले के लिए 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। इनमें 65 परियोजनाओं का लोकार्पण और 47 नई परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।
गुरु पूर्णिमा पर किया था नाम बदलने का संकेत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ही उन्होंने भदोही को संत रविदास के नाम से जोड़ने की बात कही थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, संत रविदास ने अपनी आध्यात्मिक साधना और सामाजिक विचारों के जरिए समाज को जोड़ने का संदेश दिया था। अब जिले की पहचान को उनके नाम से जोड़ा गया है।
धार्मिक और विरासत स्थलों के विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक विरासत और उनसे जुड़े स्थानों के विकास व सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दे रही है। उन्होंने अपने संबोधन में पिछली सरकारों की नीतियों पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि मौजूदा सरकार में विकास कार्यों के लिए संसाधनों का अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
सपा पर भी साधा निशाना
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने 2017 से पहले के दौर में सरकारी जमीन और विकास योजनाओं के इस्तेमाल को लेकर आरोप लगाए और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। ये आरोप मुख्यमंत्री के राजनीतिक संबोधन का हिस्सा हैं।
भदोही के कालीन उद्योग को वैश्विक पहचान
भदोही देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख कालीन उत्पादन केंद्रों में शामिल है। यहां के हाथ से बने कालीन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान रखते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के कारीगरों की पारंपरिक कला को नए बाजारों और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर सरकार का जोर है।
10 साल में यूपी के निर्यात में बढ़ोतरी का दावा
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में उत्तर प्रदेश के निर्यात में करीब 2.27 गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि भदोही की कारीगरी अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है और दुनियाभर में इसकी मांग बनी हुई है।
तीन दशकों में कई बार बदला जिले का नाम
भदोही के नाम को लेकर पिछले करीब तीन दशकों में कई बदलाव हुए हैं। 30 जून 1994 को यह जिला वाराणसी से अलग होकर भदोही के नाम से अस्तित्व में आया। इसके बाद 1997 में इसका नाम संत रविदास नगर किया गया और 1999 में इसे संत रविदास नगर भदोही नाम दिया गया। 2014 में इसे फिर से सिर्फ भदोही कहा गया। अब 4 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे फिर ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम से पुकारे जाने की घोषणा की है।
कालीन उद्योग और रोजगार पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही के कारीगरों की पारंपरिक कला को बाजार से जोड़ने, कारोबार के विस्तार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। भदोही में 50वें इंटरनेशनल कारपेट एक्सपो का भी आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया।
अब नई पहचान के साथ आगे बढ़ेगा भदोही
नाम बदलने की घोषणा के साथ ही भदोही की पहचान अब संत रविदास के नाम से भी जुड़ गई है। वहीं, जिले की सबसे बड़ी पहचान माने जाने वाले कालीन उद्योग और उससे जुड़े कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की कोशिशों को भी सरकार ने विकास एजेंडे में प्रमुखता दी है।

