कांग्रेस ने रविवार को चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि अलग-अलग चरणों में करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के नोटिस दिए गए हैं।
पहले दो चरणों में 7.8 करोड़ नाम हटाने का दावा
जयराम रमेश के मुताबिक, SIR के पहले चरण की शुरुआत जून 2025 में बिहार से हुई थी। इसके बाद नवंबर 2025 में नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरा चरण शुरू हुआ। कांग्रेस का दावा है कि इन दोनों चरणों में कुल 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो SIR से पहले की मतदाता सूची का करीब 13 प्रतिशत है।
तीसरे चरण में 6.18 करोड़ नाम हटने का दावा
रमेश ने कहा कि SIR का तीसरा चरण 2026 के मध्य में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ। कांग्रेस द्वारा 12 राज्यों और दो UTs के आंकड़ों के आधार पर किए गए दावे के अनुसार, 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ नाम हटाए गए। यह संख्या संबंधित मतदाताओं के 17 प्रतिशत से अधिक बैठती है।
5.43 करोड़ मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेजों के नोटिस
कांग्रेस के मुताबिक, इसके अलावा 5.43 करोड़ मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के नोटिस दिए गए हैं। रमेश ने दावा किया कि इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का जोखिम बना हुआ है। उनके अनुसार, नाम हटाए गए और संभावित रूप से हटाए जाने वाले मतदाताओं को मिलाकर आंकड़ा करीब 32 प्रतिशत तक पहुंचता है।
किन राज्यों में कितना असर?
रमेश ने अपने बयान में दिल्ली में 53.73%, तेलंगाना में 48.90%, झारखंड में 39.57%, हरियाणा में 37.5%, उत्तराखंड में 35.71%, मेघालय में 35.36%, महाराष्ट्र में 33.88%, कर्नाटक में 27.6%, ओडिशा में 23.67%, आंध्र प्रदेश में 21.17% और पंजाब में 15.23% का आंकड़ा बताया। ये आंकड़े कांग्रेस द्वारा पेश किए गए विश्लेषण पर आधारित हैं।
वंचित वर्गों पर ज्यादा असर का आरोप
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के मतदाता disproportionately प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई बड़े राज्यों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के अधिक नाम हटाए गए हैं। इन दावों को कांग्रेस की ओर से SIR की प्रक्रिया पर उठाई गई आपत्तियों के रूप में देखा जाना चाहिए।
दिल्ली में 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस
दिल्ली में SIR के तहत 33,12,919 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें 13,79,785 ‘No Mapping’ और 19,33,134 ‘Logical Discrepancies’ श्रेणी में हैं। दिल्ली CEO कार्यालय ने 19 सितंबर को बूथ स्तर की जानकारी और नोटिस के कारणों से जुड़ा डेटा सार्वजनिक किया।
47 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
दिल्ली की 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97,53,577 मतदाता दर्ज हैं, जबकि 30 जून की सूची में यह संख्या 1,45,10,299 थी। यानी ड्राफ्ट सूची में करीब 47.57 लाख नाम कम हुए हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव SIR के दौरान विभिन्न श्रेणियों में किए गए सत्यापन और हटाए गए नामों से जुड़ा है।
SIR का उद्देश्य क्या बताता है चुनाव आयोग?
चुनाव आयोग के अनुसार SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है, ताकि कोई पात्र नागरिक छूटे नहीं और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न रहे। आयोग ने तीसरे चरण के लिए 16 राज्यों और तीन UTs में 36.73 करोड़ मतदाताओं को कवर करने की जानकारी दी थी।
‘Shah Instigated Removal’ पर सियासी बयानबाजी
जयराम रमेश ने SIR को लेकर “Shah Instigated Removal” शब्द का इस्तेमाल किया और इसे संविधान पर हमला बताया। यह कांग्रेस नेता की राजनीतिक टिप्पणी है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के समावेशन से जुड़ी प्रक्रिया बताता है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
दिल्ली SIR से संबंधित पारदर्शिता और नोटिस पाने वाले मतदाताओं की जानकारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अदालत इस मामले पर 22 सितंबर 2026 को सुनवाई करने वाली है। याचिका में नोटिस जारी करने के आधार और ‘Logical Discrepancies’ की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की गई है।

