रांची: झारखंड सरकार की ओर से JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के कुछ घंटों बाद ही इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए नियुक्त किए गए सरकारी कर्मचारियों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच होनी चाहिए, लेकिन नियुक्त उम्मीदवारों को अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया जाना चाहिए।
प्रदर्शन कर रहीं चंदा कुमारी ने PTI से कहा कि भर्ती प्रक्रिया के बाद नौकरी पा चुके हजारों उम्मीदवार सरकार के फैसले से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पूरी परीक्षा रद्द कर देने से वास्तव में न्याय सुनिश्चित हो जाएगा।
उन्होंने कहा, “सरकार ने पिछले 24 दिनों से सिर्फ एक पक्ष की बात सुनी है। दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया।” उनके मुताबिक, नियुक्त कर्मचारी अब मीडिया के जरिए अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं।
सरकार ने कई परीक्षाएं रद्द कीं
झारखंड सरकार ने मंगलवार तड़के हुई विशेष कैबिनेट बैठक में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह निर्णय प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों और उनकी ओर से उठाई गई चिंताओं पर विचार करने के बाद लिया गया।
सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द करने का ऐलान किया है। वहीं भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच झारखंड CID को सौंपी गई है।
16 दिन बाद देवेंद्र नाथ महतो ने खत्म किया अनशन
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले के बाद अपना 16 दिन का आमरण अनशन खत्म कर दिया।
उन्होंने JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने को झारखंड के लिए “बड़ी जीत” बताया, हालांकि साथ ही कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार की उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
परीक्षा व्यवस्था में बदलाव का ऐलान
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाने की बात कही है। इनमें हर साल समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर जारी करना, तकनीक-सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था, समय पर आंसर की और OMR शीट जारी करना तथा कई स्तरों पर जवाबदेही तय करना शामिल है।
अब JSSC-CGL रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल उन हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर है, जिन्हें इसी भर्ती प्रक्रिया के जरिए सरकारी नियुक्ति मिल चुकी है। नियुक्त कर्मचारियों का कहना है कि किसी भी कार्रवाई से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने और अपनी नियुक्ति का भविष्य स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।


